News Desk: दुनिया के मौसम को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ रही है। प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा El Niño इस बार सामान्य से कहीं ज्यादा ताकतवर रूप ले सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO के ताजा अनुमान के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान सामान्य से करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक पहुंच सकता है। WMO के मुताबिक यह स्तर रिकॉर्ड पर सबसे ऊंचे El Niño घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है।
यही वजह है कि मौसम विशेषज्ञों के जारी किए गए ग्लोबल मैप में दुनिया के बड़े हिस्से लाल रंग में नजर आ रहे हैं। हालांकि यहां “लाल रंग” का मतलब यह नहीं है कि पूरी धरती पर किसी तरह की आधिकारिक रेड अलर्ट चेतावनी जारी हो गई है। यह उन इलाकों को दिखाने वाला जलवायु पूर्वानुमान है जहां सामान्य से अधिक तापमान की संभावना है।
आखिर El Niño है क्या?
El Niño कोई तूफान या अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह El Niño-Southern Oscillation (ENSO) नाम के प्राकृतिक जलवायु चक्र का गर्म चरण है।
आम तौर पर भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान और हवाओं में बदलाव होता है। जब पूर्वी और मध्य प्रशांत का पानी असामान्य रूप से गर्म होता है, तो इसका असर समुद्र से हजारों किलोमीटर दूर मौजूद देशों के मौसम पर भी पड़ सकता है।
यानी प्रशांत महासागर में बदलाव का असर कहीं सूखे, कहीं भारी बारिश, कहीं असामान्य गर्मी और कहीं तूफानी मौसम के रूप में दिखाई दे सकता है।
इस बार इतना बड़ा खतरा क्यों?
सबसे बड़ा कारण है El Niño की असाधारण ताकत।
NOAA के सितंबर के आकलन में ही El Niño के 2026 की शरद और सर्दियों में बहुत मजबूत होने की संभावना 90% से अधिक बताई गई थी। NOAA के मॉडल में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान 1950 के बाद के ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत El Niño की संभावना भी काफी ऊंची थी।
अब WMO का नया अनुमान बताता है कि El Niño दिसंबर के आसपास चरम पर पहुंच सकता है और फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग 100% संभावना है।
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा प्रशांत महासागर के तापमान का है।
अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर 2026 में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से लगभग 3.7°C अधिक रहने का अनुमान है।
तुलना के लिए, नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के दौरान पिछला बड़ा रिकॉर्ड करीब 2.6°C था।
“Earth Almost Entirely in Red” का मतलब क्या है?
मौसम विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए ग्लोबल मैप में लाल रंग का बड़ा हिस्सा यह संकेत देता है कि दुनिया के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना बनी हुई है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर लाल इलाके में रिकॉर्ड गर्मी निश्चित है।
Seasonal climate maps संभावनाएं दिखाते हैं, स्थानीय मौसम का पक्का पूर्वानुमान नहीं। WMO ने भी साफ किया है कि उसके बड़े पैमाने के मौसमी संकेत राष्ट्रीय और स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों का विकल्प नहीं हैं।
भारत के लिए क्या संकेत?
भारत के लिए यह हिस्सा खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
WMO के अक्टूबर-दिसंबर 2026 के पूर्वानुमान में Indian subcontinent के लिए सामान्य से कम बारिश की ओर इशारा करने वाला dry signal दिया गया है। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे भारत में हर जगह सूखा पड़ेगा, बल्कि मौसमी स्तर पर सामान्य से कम वर्षा की संभावना बढ़ सकती है।
इसका असर कृषि, जल संसाधन, बिजली की मांग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।
हालांकि भारत में वास्तविक असर क्षेत्र-दर-क्षेत्र अलग होगा, क्योंकि El Niño अकेला मौसम तय नहीं करता। स्थानीय हवाएं, मानसून की स्थिति, समुद्री तापमान और दूसरे climate drivers भी भूमिका निभाते हैं।
कहीं सूखा तो कहीं बाढ़- कैसे?
El Niño का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ तापमान बढ़ाना नहीं है। यह atmospheric circulation और rainfall patterns को बदल सकता है।
WMO के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है, जबकि कई दूसरे क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का संकेत है।
यानी एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दो बिल्कुल विपरीत तस्वीरें देखने को मिल सकती हैं—
एक तरफ:
- सूखा
- जंगलों में आग
- पानी की कमी
- फसल पर दबाव
दूसरी तरफ:
- अत्यधिक बारिश
- बाढ़
- भूस्खलन
- तूफानी मौसम
यही El Niño को एक वैश्विक climate risk बनाता है।
दुनिया के कई हिस्सों में असर के संकेत
इसका असर पहले से अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। इंडोनेशिया में कम बारिश और सूखी जमीन ने जंगलों और peatland fires का खतरा बढ़ाया है। वहीं प्रशांत क्षेत्र में असामान्य समुद्री परिस्थितियां tropical cyclone activity को प्रभावित कर रही हैं।
अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी अत्यधिक गर्मी और असामान्य वर्षा की परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं।
हालिया वैश्विक forecasts में दक्षिण एशिया, भारत के कुछ हिस्सों, इंडोनेशिया और कई अन्य क्षेत्रों में असामान्य गर्म या शुष्क परिस्थितियों की संभावना दिखाई गई है।
क्या 2027 सबसे गर्म साल बन सकता है?
यह संभावना भी वैज्ञानिक चर्चा में है।
El Niño पहले से गर्म हो रही धरती में अतिरिक्त गर्मी जोड़ सकता है। समुद्र में जमा गर्मी का एक हिस्सा वातावरण में पहुंचता है, जिससे वैश्विक औसत तापमान पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
कुछ विश्लेषणों में 2027 के बेहद गर्म वर्ष बनने की संभावना जताई गई है, लेकिन यह अभी पूर्वानुमान है, निश्चित परिणाम नहीं।
4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान कितना गंभीर है?
University of Chicago के Climate Impact Lab के शोधकर्ताओं ने इस “super-El Niño” के कारण जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनिया में 4.51 लाख तक अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है। यह एक मॉडल-आधारित अनुमान है, न कि भविष्य में होने वाली मौतों की निश्चित संख्या।
इस तरह के अनुमान का उद्देश्य संभावित climate impacts की गंभीरता को समझना है—खासकर heat stress, extreme weather, food insecurity और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के संदर्भ में।
क्या यह Climate Change की वजह से हो रहा है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
El Niño स्वयं एक प्राकृतिक climate phenomenon है। यह मानव गतिविधियों से पैदा नहीं हुआ है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले से गर्म हो रही दुनिया में El Niño के प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
यानी एक तरफ प्राकृतिक climate cycle है और दूसरी तरफ greenhouse gases के कारण बढ़ता long-term global warming trend। दोनों एक साथ होने पर extreme temperatures और weather disruptions का खतरा बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा?
WMO के अनुसार El Niño दिसंबर के आसपास peak कर सकता है और इसके प्रभाव 2027 की शुरुआत तक बने रहने की संभावना है।
आने वाले महीनों में सबसे ज्यादा नजर इन चार चीजों पर होगी-
- वैश्विक तापमान कितने नए रिकॉर्ड बनाता है
- भारत और दक्षिण एशिया में बारिश कैसी रहती है
- सूखे और जंगलों की आग का दायरा कितना बढ़ता है
- भारी बारिश, बाढ़ और tropical cyclones की घटनाएं कितनी बढ़ती हैं
निष्कर्ष
प्रशांत महासागर में बढ़ता तापमान सिर्फ समुद्र की कहानी नहीं है। इसका असर हवा, बारिश, खेती, पानी, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।
“Super-Duper El Niño” कोई आधिकारिक वैज्ञानिक श्रेणी नहीं, बल्कि इसकी असाधारण ताकत को बताने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा अनौपचारिक शब्द है। आधिकारिक वैज्ञानिक आकलन इसे एक बेहद मजबूत El Niño घटना के रूप में देख रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है, प्रशांत महासागर गर्म हो रहा है, El Niño मजबूत हो रहा है और दुनिया के मौसम का संतुलन अगले कई महीनों तक असामान्य रह सकता है।





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