News Desk: कभी IT सेक्टर को भारत की सबसे सुरक्षित और तेजी से बढ़ती नौकरियों का रास्ता माना जाता था। लेकिन 2026 में तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “अगली छंटनी किस कंपनी में होगी?” बल्कि बड़ा सवाल है—क्या AI और automation उस नौकरी की जरूरत ही खत्म कर देंगे, जिसे करने वाला कर्मचारी आज पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहा है?
हालिया घटनाक्रम इस डर को और मजबूत करते हैं। Visa ने दुनिया भर में करीब 2,600 नौकरियां यानी लगभग 7% workforce कम करने का फैसला किया, जिसका असर भारत में भी दिखाई दिया। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में Visa के टेक कर्मचारियों के बीच layoffs में junior से लेकर senior और leadership स्तर तक के कर्मचारी प्रभावित हुए।
इसके कुछ ही समय पहले Microsoft ने लगभग 4,800 कर्मचारियों की कटौती की, जो उसकी global workforce का करीब 2.1% है। कंपनी AI infrastructure और technology में भारी निवेश कर रही है और इसी दौर में workforce restructuring भी जारी है।
लेकिन कहानी सिर्फ AI से नौकरी जाने की नहीं है
2026 के पहले सात महीनों में दुनिया भर में 1.28 लाख से ज्यादा tech jobs AI-driven layoffs के बीच प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। तुलना करें तो 2023 में global tech layoffs करीब 2.66 लाख तक पहुंच गए थे। यानी संकट नया नहीं है, लेकिन इस बार बदलाव की वजह ज्यादा structural दिखाई दे रही है—कंपनियां सिर्फ लागत घटाने के लिए नहीं, बल्कि AI से ज्यादा काम कम लोगों के जरिए कराने की दिशा में बढ़ रही हैं।
और यहीं भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है।
भारत का IT-BPM सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार देता है और देश के सबसे बड़े services-export engines में शामिल है। लंबे समय तक इसका business model बड़े पैमाने पर software development, testing, maintenance और business-process work पर टिका रहा। लेकिन Generative AI और AI agents अब इन कामों के कई हिस्सों को तेजी से automate कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा खतरा किसे?
शायद उस कर्मचारी को नहीं जो AI इस्तेमाल करना जानता है, बल्कि उस role को है जिसका ज्यादातर काम repetitive और predictable है।
PwC की 2026 AI Jobs Barometer ने एक अरब से ज्यादा job advertisements का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के मुताबिक AI-exposed कंपनियों में productivity growth कम-exposed कंपनियों की तुलना में 40% ज्यादा रही। AI skills वाली jobs लगभग 69% तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि overall jobs growth करीब 9% रही। साथ ही AI skills का औसत wage premium बढ़कर 62% हो गया है।
यानी AI एक साथ दो काम कर रहा है—कुछ jobs को खत्म कर रहा है और कुछ नई, ज्यादा skilled jobs पैदा कर रहा है।
H-1B वाला खतरा और बड़ा क्यों है?
भारत के हजारों IT professionals अमेरिकी कंपनियों और H-1B visa ecosystem से जुड़े हैं। नौकरी जाने पर उनके लिए समस्या सिर्फ बेरोजगारी नहीं होती—visa status और अमेरिका में रहने का अधिकार भी सवाल बन जाता है।
और अब अमेरिका में H-1B कर्मचारियों की job-loss grace period को लेकर संभावित बदलाव की खबरें इस चिंता को और बढ़ा रही हैं। मौजूदा व्यवस्था में सामान्यतः नौकरी जाने के बाद 60 दिन तक नया employer खोजने का समय मिलता है; प्रस्तावित बदलाव इसे काफी कठोर बना सकता है।
तो क्या IT का भविष्य खत्म हो रहा है?
नहीं। लेकिन IT नौकरी का पुराना मॉडल जरूर खत्म हो रहा है।
भविष्य में सिर्फ coding जानना पर्याप्त नहीं होगा। AI को operate करना, सही सवाल पूछना, architecture समझना, cybersecurity, data, cloud, AI governance और सबसे महत्वपूर्ण—human judgement—की कीमत बढ़ेगी।
PwC के मुताबिक AI-exposed junior roles अब traditionally senior skills जैसे judgement और leadership मांगने की संभावना में करीब 7 गुना ज्यादा हैं।
यानी आने वाले समय की असली प्रतिस्पर्धा “इंसान बनाम AI” नहीं होगी।
प्रतिस्पर्धा होगी—
“AI इस्तेमाल करने वाला इंसान बनाम AI इस्तेमाल न करने वाला इंसान।”
और शायद यही 2026 के IT layoffs का सबसे बड़ा सबक है।




Join the discussion
No comments yet — be the first to weigh in.