News Desk: भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जा चुके कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और लगातार इस्तेमाल किए जा रहे ‘फ्रॉडस्टर’ और ‘भगोड़ा’ जैसे शब्दों पर सवाल उठाते हुए बेहद तंज भरा बयान दिया है—“शायद मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद कॉकरोच की तरफ जिंदगी बेहतर हो।”
माल्या ने अपने पोस्ट में ₹14,131.60 करोड़ की रिकवरी का मुद्दा उठाया और सवाल किया कि अगर इतनी बड़ी रकम की संपत्तियां बैंकों को वापस मिल चुकी हैं, तो उन्हें अब भी फ्रॉडस्टर क्यों कहा जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल ED के एक हलफनामे का हवाला देकर यह सवाल उठाया है।
₹14,131 करोड़ की कहानी क्या है?
यहां सबसे जरूरी बात आंकड़े को सही तरीके से समझना है। ED के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक विजय माल्या मामले में ₹14,131.60 करोड़ की assets SBI-led consortium को restore की गई हैं। ED की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार Kingfisher Airlines से जुड़े मामले में ₹6,777.36 करोड़ के बैंक फ्रॉड का उल्लेख है और माल्या को 5 जनवरी 2019 को Fugitive Economic Offender घोषित किया गया था। इसके बाद ₹14,131.6 करोड़ की assets भारत सरकार को confiscate की गईं और SBI-led consortium को restore की गईं।
इसलिए ₹14,131 करोड़ को “माल्या ने बैंक को कैश में चुका दिया” समझना गलत होगा। यह मुख्य तौर पर जब्त और restitute की गई संपत्तियों का मूल्य है।
फिर माल्या का सवाल क्या है?
माल्या का तर्क है कि Debt Recovery Tribunal ने उनके मामले में Kingfisher Airlines का judgment debt लगभग ₹6,203 करोड़ तय किया था, जिसमें ब्याज भी शामिल था। वह इसी आंकड़े की तुलना ₹14,131.60 करोड़ की recovered/restored assets से कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि अगर बैंकों को इतनी बड़ी value वापस मिल चुकी है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई और उन्हें दिए जा रहे ‘fraudster’ या ‘fugitive’ जैसे labels का आधार क्या है।
हालांकि यह माल्या का पक्ष और उनका कानूनी तर्क है, अंतिम कानूनी स्थिति इससे तय नहीं होती।
क्या बैंकों को सच में पैसा वापस मिला?
हां, ED के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक assets की restitution हुई है। ED ने बताया कि SBI-led consortium को माल्या से जुड़ी assets वापस की गईं। 2021 में ED ने पहले ही बताया था कि consortium ने assets की बिक्री और liquidation के जरिए हजारों करोड़ रुपये realise किए थे और बाद में कई और assets SBI-led consortium को hand over किए गए थे।
इतना ही नहीं, 2025 में ED ने बताया कि restituted assets में से ₹311.67 करोड़ का इस्तेमाल Kingfisher Airlines के पूर्व कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित workmen dues चुकाने के लिए किया गया।
फिर ‘भगोड़ा’ क्यों?
माल्या को Fugitive Economic Offender Act, 2018 के तहत 5 जनवरी 2019 को Fugitive Economic Offender घोषित किया गया था। ED के मुताबिक उनका प्रत्यर्पण भारत लाने की प्रक्रिया भी लंबे समय से चलती रही है।
फरवरी 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट की कार्यवाही में भी उनके भारत लौटने और अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से जुड़े सवाल उठे थे। Zingabad की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जो व्यक्ति जानबूझकर proceedings से बच रहा है, वह समानता के आधार पर राहत का दावा नहीं कर सकता।
असली सवाल क्या है?
विजय माल्या का नया बयान एक महत्वपूर्ण बहस जरूर खड़ी करता है—अगर जब्त संपत्तियों की बड़ी रकम बैंकों को वापस मिल चुकी है, तो recovery, outstanding liability और criminal proceedings को कानूनी तौर पर कैसे देखा जाता है?
लेकिन इन तीनों चीजों को अलग-अलग समझना जरूरी है। Asset recovery का होना अपने आप में आपराधिक मामले के खत्म होने या किसी व्यक्ति के कानूनी दर्जे को बदलने के बराबर नहीं है।
यही वजह है कि माल्या का ‘कॉकरोच’ वाला बयान सोशल मीडिया पर भले वायरल हो रहा हो, लेकिन ₹14,131.60 करोड़ का आंकड़ा अपने आप में उनकी कानूनी स्थिति को खत्म नहीं करता। आधिकारिक रिकॉर्ड और अदालतों के आदेश ही इस मामले की अंतिम तस्वीर तय करेंगे।




Join the discussion
No comments yet — be the first to weigh in.