News Desk : झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों छात्र पिछले दो सप्ताह से सड़कों पर हैं। यह विरोध प्रदर्शन अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। आंदोलन के 14वें दिन झारखंड सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई। सरकार ने छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया और विस्तृत जांच के लिए समय मांगा, लेकिन प्रदर्शनकारी तब तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि हाल ही में आयोजित 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ी और मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। इसी कारण छात्र परीक्षा रद्द कर स्वतंत्र जांच एजेंसी, विशेषकर CBI जांच, की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई, भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार तथा भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र लागू करना शामिल है। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के रोजगार और भरोसे का सवाल है।
सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने छात्र नेताओं से मुलाकात की। बैठक के बाद सरकार ने कहा कि छात्रों की मांगें उचित मंच पर रखी जाएंगी और हर बिंदु की जांच कर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि सरकार ने तत्काल कोई घोषणा नहीं की, जिससे प्रदर्शनकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए। इसी बीच आंदोलन स्थल पर कुछ छात्र लगातार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जिनमें से एक छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
राजनीतिक रंग भी चढ़ा
समय बीतने के साथ यह आंदोलन राजनीतिक रूप भी लेने लगा है। विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी छात्रों की मांगों के प्रति सहानुभूति जताई है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है और देशभर के कई छात्र संगठनों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई है।
आगे क्या?
फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुल गया है, लेकिन समाधान अभी दूर दिखाई देता है। यदि जल्द कोई ठोस फैसला नहीं होता, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में देशभर में सामने आए विभिन्न परीक्षा विवादों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे में झारखंड का यह आंदोलन केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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