News Desk: पुणे के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की तस्वीर और उलझती जा रही है। अब पुलिस जांच में एक तीसरे व्यक्ति का नाम सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह शख्स कथित तौर पर हत्या की योजना के बारे में पहले से जानता था और मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का सहपाठी है।
इस व्यक्ति की पहचान रितेश हिंगे के तौर पर हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है और यह जांच की जा रही है कि उसे कथित साजिश की कितनी जानकारी थी और उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी। फिलहाल उसके खिलाफ आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
क्या रितेश को पहले से पता थी हत्या की योजना?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक रितेश, चेतन चौधरी का सहपाठी है और 18 जून को लोहागढ़ किले में केतन की हत्या की कथित योजना के बारे में उसे पहले से जानकारी थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि चेतन और उसकी गर्लफ्रेंड सिया गोयल ने उसके साथ हत्या की योजना और उसे अंजाम देने के तरीके पर चर्चा की थी।
इतना ही नहीं, पुलिस के मुताबिक सिया और चेतन ने रितेश को कई बार उनके साथ लोहागढ़ चलने के लिए कहा था। हालांकि, उसने कथित तौर पर उनके साथ जाने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद जांचकर्ताओं को शक है कि उसे पूरी योजना की जानकारी थी।
हत्या के बाद भी संपर्क में थे?
जांच में एक और अहम बात सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, केतन की हत्या के बाद चेतन चौधरी कथित तौर पर रितेश से मिला था। सिया के भी उसके संपर्क में रहने की बात सामने आई है।
पुलिस कथित तौर पर चेतन के मोबाइल फोन से मिली जानकारी के आधार पर रितेश तक पहुंची। अब जांच का एक बड़ा सवाल यही है कि हत्या के बाद दोनों के बीच किस तरह की बातचीत हुई और क्या रितेश को अपराध के बाद की किसी गतिविधि की जानकारी थी।
दो आरोपियों से तीन तक कैसे पहुंची जांच?
केतन अग्रवाल की मौत 18 जून 2026 को लोहागढ़ किले में हुई थी। शुरुआत में इसे ट्रेकिंग के दौरान दुर्घटना माना गया था, लेकिन बाद में CCTV फुटेज, फोन रिकॉर्ड और आरोपियों के बयानों में कथित विरोधाभासों ने पुलिस को हत्या की दिशा में जांच बढ़ाने पर मजबूर किया।
पुलिस की जांच में सिया गोयल और चेतन चौधरी पर केतन को कथित तौर पर खाई में धकेलने की साजिश का आरोप लगाया गया। जांच में दोनों के बीच हजारों फोन कॉल, डिजिटल साक्ष्य और कथित तौर पर हत्या की पहले की कोशिशों से जुड़े सुराग सामने आने की बात कही गई थी।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल
तीसरे नाम के सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रितेश सिर्फ योजना की जानकारी रखने वाला व्यक्ति था या उसने किसी स्तर पर साजिश में मदद भी की थी।
क्या उसे हत्या से पहले पूरी योजना पता थी? क्या उसने किसी तरह की सहायता की? हत्या के बाद चेतन और सिया से उसका संपर्क क्यों हुआ? और क्या फोन में मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड इन सवालों का जवाब दे सकते हैं?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच का हिस्सा हैं। लेकिन इतना जरूर है कि केतन अग्रवाल हत्याकांड अब सिर्फ सिया गोयल और चेतन चौधरी तक सीमित नहीं दिख रहा। तीसरे संदिग्ध की एंट्री ने पुलिस के सामने इस कथित साजिश की पूरी कड़ी को फिर से जोड़ने की चुनौती खड़ी कर दी है।

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