News Desk: नौकरी की शुरुआत में सबसे ज्यादा चिंता होती है। पहली कार, अपना घर, बच्चों की पढ़ाई या विदेश यात्रा। लेकिन एक सवाल अक्सर टलता रहता है, जब salary आनी बंद होगी, तब जिंदगी कैसे चलेगी?
भारत के middle class को लेकर यही चेतावनी Mirae Asset Investment Managers के Vice Chairman और CEO Swarup Mohanty ने दी है। उनका कहना है कि 35 की उम्र तक व्यक्ति को यह समझ लेना चाहिए कि उसकी working life हमेशा नहीं चलेगी और retirement के बाद कई दशकों तक खर्च चलाने के लिए पर्याप्त corpus बनाना जरूरी है।
सबसे बड़ा दुश्मन: समय
Mohanty ने compounding का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति ₹10 करोड़ का corpus बनाना चाहता है और 20 साल की उम्र से लगभग 12% annual return मानकर निवेश शुरू करता है, तो उसे मोटे तौर पर ₹10,000- ₹20,000 महीने के निवेश से लक्ष्य हासिल करने की संभावना हो सकती है।
लेकिन यही शुरुआत अगर 40 की उम्र में हो, तो आवश्यक monthly investment लगभग ₹2 लाख तक पहुंच सकता है।
यानी समस्या सिर्फ कम कमाई नहीं है, देर से शुरुआत करना भी बहुत महंगा पड़ सकता है।
20 साल की उम्र → छोटा निवेश + लंबा समय
40 साल की उम्र → बड़ा निवेश + कम समय
यही है compounding का असली खेल।
और भारत में retirement planning की हालत?
एक 2026 survey में 40-60 वर्ष के 1,218 भारतीयों को शामिल किया गया। इसमें 75.5% लोगों के पास कोई detailed retirement plan नहीं था। हैरानी की बात यह है कि proper plan नहीं होने के बावजूद 61% से ज्यादा लोगों को भरोसा था कि वे आराम से retire हो जाएंगे।
यानी confidence ज्यादा, calculation कम।
भारत में pension ecosystem जरूर तेजी से बढ़ रहा है। 31 मार्च 2026 तक NPS के 2.17 करोड़ से ज्यादा subscribers थे और NPS का AUM लगभग ₹15.95 लाख करोड़ था। Atal Pension Yojana में करीब 8.96 करोड़ enrolments दर्ज किए गए।
लेकिन समस्या यह है कि भारत की बड़ी workforce informal sector में है, जहां employer-sponsored retirement benefits का coverage सीमित है।
Retirement के बाद असली खर्च: Medical Bills
Retirement planning में अक्सर लोग घर, बच्चों और रोजमर्रा के खर्च का हिसाब लगाते हैं, लेकिन healthcare inflation को underestimate कर देते हैं।
Mohanty की चेतावनी है कि अच्छी medical insurance को retirement planning का हिस्सा बनाना जरूरी है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ healthcare खर्च बड़ा financial burden बन सकता है।
Retirement strategist Milind Deogaonkar के अनुसार, यदि inflation करीब 6-7% और medical inflation 12–14% के आसपास रहती है, तो retirees को अपने corpus से बहुत सावधानी से withdrawal करना पड़ सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक कई मामलों में annual withdrawal को लगभग 2.5-3.5% तक सीमित रखना पड़ सकता है।
उदाहरण के लिए—
₹2 करोड़ corpus × 3% withdrawal = ₹6 लाख सालाना
यानी करीब ₹50,000 महीना।
₹3 करोड़ पर यही calculation करीब ₹75,000 महीना बैठता है।
और यह राशि inflation के साथ भविष्य में उतनी बड़ी नहीं रहेगी जितनी आज दिखाई देती है।
Middle Class के लिए खतरे की दूसरी घंटी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक FY2026 में भारतीय households की net financial assets घटकर ₹21.4 लाख करोड़ यानी GDP के 6.2% रह गईं, जबकि household financial liabilities बढ़कर ₹21.4 लाख करोड़ हो गईं।
इसका मतलब यह नहीं कि हर middle-class परिवार retirement crisis में है, लेकिन यह जरूर बताता है कि बढ़ती borrowing और inadequate long-term savings के बीच retirement planning को टालना जोखिम भरा हो सकता है।
तो कितनी उम्र में शुरू करें?
सीधा जवाब- जितना जल्दी, उतना बेहतर।
35 साल की उम्र “बहुत देर” नहीं है। लेकिन 35 के बाद हर साल की देरी compounding के लिए महंगी होती जाती है। Retirement को आखिरी 5-10 साल का लक्ष्य मानने के बजाय इसे 20–30 साल की financial project की तरह देखना होगा।
क्योंकि retirement के बाद salary बंद हो सकती है…
लेकिन बिजली का बिल, किराया, दवाइयां और महंगाई बंद नहीं होती।
और यही Swarup Mohanty की चेतावनी का सबसे बड़ा मतलब है- “Retirement की तैयारी उस दिन मत शुरू कीजिए, जिस दिन salary खत्म होने वाली हो… तैयारी उस दिन शुरू होनी चाहिए, जिस दिन salary आनी शुरू हुई थी।”





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