News Desk: मेरठ के चर्चित ‘ब्लू ड्रम’ हत्याकांड में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया है। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 कोर्ट हियरिंग और 22 गवाहों के बाद अब मुकदमे का अगला चरण सजा तय करने का है।
मेरठ का यह मामला मार्च 2025 में सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। जांच में सौरभ राजपूत के शव को टुकड़ों में काटकर सीमेंट से भरे नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपाने का आरोप सामने आया था।
अब 30 सितंबर 2026 को मेरठ जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या के मामले में दोषी ठहराया है। लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें कौन-सी सजा मिलेगी। अदालत ने सजा की मात्रा पर अलग से सुनवाई के लिए समय दिया है।
126 सुनवाई के बाद आया फैसला
इस केस की सुनवाई करीब 13 महीने चली। इस दौरान अदालत में 126 हियरिंग हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों को पेश किया।
अभियोजन की ओर से ऐसे गवाह भी पेश किए गए जिनका संबंध कथित तौर पर उस नीले ड्रम, सीमेंट, चाकू और अन्य सामान की खरीद से था।
17 सितंबर 2026 को मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसले के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की थी।
आखिर क्या था ‘ब्लू ड्रम’ केस?
यह मामला 2025 में मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके से सामने आया।
अभियोजन के अनुसार, सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को कथित तौर पर टुकड़ों में काटा गया और एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया। इसके बाद ड्रम में सीमेंट और अन्य सामग्री डालकर उसे बंद कर दिया गया।
यही ड्रम बाद में इस पूरे मामले की पहचान बन गया।
जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था। अभियोजन ने अदालत में दावा किया कि दोनों ने हत्या की साजिश रची और हत्या के बाद सबूत छिपाने का प्रयास किया।
अभियोजन की कहानी क्या थी?
अभियोजन के मुताबिक, सौरभ 2025 में विदेश से भारत लौटे थे। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि 3/4 मार्च 2025 के आसपास उन्हें कथित तौर पर नशीली दवा दी गई और इसके बाद उनकी हत्या की गई।
अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में सीमेंट से छिपाया गया।
इसके बाद मुस्कान और साहिल के हिमाचल प्रदेश जाने और वहां से गिरफ्तार किए जाने की बात जांच में सामने आई।
हालांकि इन घटनाओं के विवरण में अलग-अलग रिपोर्टों में तारीख और कुछ परिस्थितियों को लेकर अंतर मिलता है। अदालत का दोषसिद्धि संबंधी फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आया है।
22 गवाहों ने क्या भूमिका निभाई?
इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने कुल 22 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए।
इनमें कथित तौर पर शामिल थे:
- नीला ड्रम बेचने वाला व्यक्ति
- सीमेंट की खरीद से जुड़े व्यक्ति
- दवा विक्रेता
- चाकू और अन्य सामान की खरीद से जुड़े गवाह
अभियोजन ने इन गवाहियों के अलावा तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के जरिए घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने की कोशिश की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त माना।
फैसला आया, लेकिन ‘फांसी’ पर अभी फैसला नहीं
इस केस में सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि मुस्कान और साहिल को कितनी सजा मिलेगी।
इसका फैसला 30 सितंबर को नहीं हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक अदालत सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा तय करेगी। कुछ रिपोर्टों में अगली तारीख 14 अक्टूबर 2026 बताई गई है।
अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की है। अभियोजन के वकील ने मृत्युदंड की मांग किए जाने की बात भी कही है।
लेकिन मृत्युदंड की मांग और मृत्युदंड मिलना दो अलग बातें हैं। अंतिम सजा अदालत ही तय करेगी।
फैसले से पहले जेल में कैसा था माहौल?
फैसले से पहले मेरठ जिला जेल प्रशासन ने दोनों आरोपियों के व्यवहार में बदलाव की जानकारी दी थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, साहिल पिछले कुछ दिनों से अपेक्षाकृत शांत और अलग-थलग रह रहा था और अन्य कैदियों से बातचीत कम कर रहा था।
वहीं मुस्कान के बारे में जेल अधिकारियों ने बताया कि वह प्रार्थना में काफी समय बिता रही थी। दोनों के जेल में पूजा-पाठ करने की बात भी रिपोर्ट हुई थी।
दोनों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही से जोड़ा गया।
एक साल से ज्यादा चली कानूनी लड़ाई
इस केस की टाइमलाइन को अगर आंकड़ों में समझें तो तस्वीर काफी स्पष्ट होती है:
घटनाक्रमजानकारी
हत्या
मार्च 2025
गिरफ्तारी
मार्च 2025
ट्रायल
लगभग 13 महीने
कोर्ट हियरिंग
126
अभियोजन गवाह
22
अंतिम बहस
सितंबर 2026
दोषसिद्धि
30 सितंबर 2026
अगला चरण
सजा की मात्रा पर सुनवाई
इन आंकड़ों से पता चलता है कि मामला केवल सनसनीखेज अपराध की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालत में लंबे समय तक साक्ष्यों और गवाहियों की जांच हुई।
अब आगे क्या होगा?
अब केस का अगला महत्वपूर्ण चरण Sentencing Hearing है।
इस दौरान अदालत यह तय करेगी कि दोनों दोषियों को कानून के तहत कितनी सजा दी जाए। इस चरण में दोषियों को अपनी बात रखने का अवसर भी मिलता है।
यानी आज का फैसला दोष साबित होने से जुड़ा है, जबकि अंतिम सजा पर फैसला अभी बाकी है।
‘ब्लू ड्रम’ केस का अगला बड़ा सवाल
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने जांच एजेंसियों के सामने जितने सवाल खड़े किए, उससे कहीं ज्यादा सवाल इस मामले की सनसनीखेज प्रकृति ने समाज के सामने रखे।
लेकिन अदालत के स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब मामला आरोप से दोषसिद्धि के चरण में पहुंच चुका है।
30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या के मामले में दोषी ठहराया है।
अब निगाहें 14 अक्टूबर के आसपास होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि इस दोषसिद्धि के बाद दोनों को कानून के तहत क्या सजा दी जाती है।





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