News Desk: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA bloc की रैली में शामिल नहीं होने वाले यूथ कांग्रेस पदाधिकारियों पर संगठन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के 80 से अधिक पदाधिकारियों को निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है और यह संख्या 500 तक पहुंचने की आशंका है।
रैली में कांग्रेस और INDIA bloc के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। यूथ कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों को रैली और उससे पहले होने वाले मार्च में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया था।
तीन राज्यों में अब तक कार्रवाई
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश से करीब 60, हिमाचल प्रदेश से कम से कम 13 और हरियाणा से लगभग 10 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। मध्य प्रदेश में कार्रवाई में नौ जिला अध्यक्ष, पांच उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
ऐप और बारकोड से हुई हाजिरी की निगरानी
यूथ कांग्रेस ने रैली में पदाधिकारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए डिजिटल व्यवस्था बनाई थी। मिंटो रोड पर एकत्र होने के स्थान पर बारकोड स्कैनर लगाए गए थे। पदाधिकारियों और उनके साथ आए लोगों को संगठन के आधिकारिक ‘With IYC’ ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहा गया था।
यूथ कांग्रेस के मुताबिक, मिंटो रोड पर करीब 15,000 कार्यकर्ता जुटे थे, लेकिन ऐप पर केवल 2,831 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ। संगठन की समीक्षा में यह बात सामने आई कि कई लोगों ने तकनीकी जानकारी या रुचि की कमी के चलते चेक-इन नहीं किया। मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक धीमे इंटरनेट ने भी रजिस्ट्रेशन प्रभावित किया।
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने क्या कहा?
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने NDTV से कहा कि रैली सफल रही और देशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। हालांकि, उनके मुताबिक स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ पदाधिकारियों ने संगठनात्मक अनुशासन का पालन नहीं किया, इसलिए जवाबदेही तय करने के लिए कार्रवाई की गई।
चिब ने कहा कि निष्क्रिय पदाधिकारियों की जगह मेहनती कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने अगली बार दिल्ली में 50,000 कार्यकर्ताओं को जुटाने की उम्मीद भी जताई।
मुख्य कांग्रेस संगठन की भी समीक्षा
रैली के बाद कांग्रेस के वॉर रूम ने मुख्य संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की समीक्षा शुरू की है। खास तौर पर ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत नियुक्त जिला अध्यक्षों से जुड़ी रिपोर्ट मांगी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, बिना उचित कारण रैली से अनुपस्थित रहने वाले जिला अध्यक्षों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
10 लाख की भीड़ के दावे पर सियासी बहस
रैली से पहले कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था। हालांकि, पार्टी सूत्रों के मुताबिक वास्तविक भीड़ इस लक्ष्य के 10 फीसदी से भी कम रही। कांग्रेस नेतृत्व ने रैली को सफल बताया, जबकि भाजपा ने भीड़ के दावों पर सवाल उठाए।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि रामलीला मैदान का करीब 40 फीसदी हिस्सा खाली था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रैली के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि यह जनसमर्थन लोकतंत्र और INDIA bloc की जीत सुनिश्चित करेगा।
रैली में विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
1 नवंबर की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत INDIA bloc के कई नेता शामिल हुए।
राहुल गांधी ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा EVM के जरिए कथित वोट चोरी के आरोप लगाए। विपक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। ये विपक्षी दलों के आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
संगठनात्मक अनुशासन बनाम राजनीतिक संदेश
दिल्ली रैली के बाद यूथ कांग्रेस की कार्रवाई संगठन के भीतर अनुशासन लागू करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। एक ओर कांग्रेस नेतृत्व रैली को चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता का प्रदर्शन बता रहा है, वहीं दूसरी ओर पदाधिकारियों की गैरहाजिरी पर कार्रवाई ने संगठन की तैयारी और आंतरिक जवाबदेही को चर्चा में ला दिया है।
स्रोत: NDTV, India Today





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