News Desk: दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ ही वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर से पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-II को लागू कर दिया। इस चरण में सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं।
GRAP-II का उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़कों की मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव, सार्वजनिक परिवहन की सेवाओं में बढ़ोतरी, पार्किंग शुल्क में बदलाव और डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियंत्रण जैसे उपाय शामिल हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या इन प्रतिबंधों से लोगों की सेहत को वास्तविक राहत मिल सकती है? विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई से हवा में मौजूद हानिकारक कणों का स्तर कम हो सकता है। हालांकि, इसका असर नियमों के पालन, मौसम और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी निर्भर करता है।
क्या है GRAP-II और कब लागू होता है?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति के अनुसार लागू किए जाने वाले चरणबद्ध उपायों का ढांचा है। इसमें चार चरण हैं:
चरण
AQI श्रेणी
GRAP-I
खराब: 201–300
GRAP-II
बहुत खराब: 301–400
GRAP-III
गंभीर: 401–450
GRAP-IV
गंभीर प्लस: 450 से अधिक
GRAP के तहत पहले लागू किए गए उपाय अगले चरण में भी जारी रहते हैं। जरूरत पड़ने पर मौसम के पूर्वानुमान और प्रदूषण की संभावित स्थिति को देखते हुए भी प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।
GRAP-II में कौन-कौन से प्रतिबंध लागू होते हैं?
GRAP-II के तहत दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए कई उपायों को तेज किया जाता है।
1. सड़कों की सफाई और धूल पर नियंत्रण
प्रदूषण वाले इलाकों और प्रमुख सड़कों पर मैकेनिकल या वैक्यूम स्वीपिंग बढ़ाई जाती है। सड़कों पर पानी का छिड़काव और जरूरत के अनुसार डस्ट सप्रेसेंट का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य सड़क की धूल को हवा में दोबारा फैलने से रोकना है।
2. पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी
निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जा सकता है। इससे लोगों को सार्वजनिक परिवहन या साझा यात्रा के विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
3. मेट्रो और बस सेवाओं में इजाफा
दिल्ली मेट्रो, सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या या फ्रीक्वेंसी बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाते हैं। सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाकर निजी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की कोशिश की जाती है।
4. डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियंत्रण
डीजल जनरेटर के संचालन को निर्धारित उत्सर्जन मानकों और छूट के नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है। आवश्यक सेवाओं के लिए कुछ अपवाद हो सकते हैं। बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया जाता है, ताकि बैकअप जनरेटर पर निर्भरता घटे।
5. सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव
सरकारी कार्यालयों और नगर निकायों के कामकाज के समय में अंतर रखने जैसे उपायों पर अमल किया जा सकता है, ताकि एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम हो।
6. खुले में कचरा जलाने पर रोक
कचरा और बायोमास जलाने से हवा में प्रदूषक कण बढ़ते हैं। GRAP के तहत खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई और उसके उचित निपटान पर जोर दिया जाता है। बाहर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बिजली के हीटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ठंड में आग जलाने की जरूरत न पड़े।
7. वाहनों और औद्योगिक इकाइयों की जांच
वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच, धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई और पुराने वाहनों से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। उद्योगों, ईंट भट्ठों और बिजली संयंत्रों में भी प्रदूषण नियंत्रण मानकों की जांच तेज की जाती है।
क्या GRAP-II से सेहत को राहत मिल सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि GRAP-II के उपायों से प्रदूषण के स्तर में वास्तविक कमी आती है, तो लोगों के प्रदूषित हवा के संपर्क में आने का जोखिम कम हो सकता है।
वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण खास तौर पर चिंता का विषय हैं। ये कण सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने का संबंध अस्थमा, श्वसन संक्रमण, फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी और हृदय संबंधी बीमारियों से जोड़ा गया है।
दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नवीन सूद के मुताबिक, प्रदूषित हवा का असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। सड़क की धूल और वाहनों के उत्सर्जन को कम करने से आंख, नाक और गले में जलन, खांसी तथा सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों के जोखिम को घटाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, GRAP-II कोई तत्काल समाधान नहीं है। हवा की गति कम होने, तापमान में बदलाव और प्रदूषकों के जमीन के पास फंसे रहने जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियां प्रदूषण को लंबे समय तक बनाए रख सकती हैं। कुछ समय के लिए AQI में सुधार आने का अर्थ यह भी नहीं है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से हुए स्वास्थ्य प्रभाव खत्म हो गए हैं।
प्रदूषण के दौरान लोग अपनी सेहत कैसे बचाएं?
सरकारी प्रतिबंध प्रदूषण के स्रोतों को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन लोगों को भी अपनी ओर से सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक:
· बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। यह हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है।
· बहुत खराब AQI के दौरान आउटडोर व्यायाम सीमित रखें। दौड़ने, साइकिल चलाने या खुले में कठिन व्यायाम से बचें।
· बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें। अस्थमा, COPD या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को प्रदूषण के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
· घर के अंदर हवा को साफ रखने की कोशिश करें। अधिक प्रदूषण के समय खिड़कियां बंद रखें और उपलब्ध होने पर HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल करें।
· घर के भीतर धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें। कचरा, लकड़ी या अन्य सामग्री न जलाएं।
· लक्षणों को नजरअंदाज न करें। लगातार खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
· दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें। पहले से श्वसन संबंधी बीमारी है तो अपनी निर्धारित दवाओं और उपचार योजना का पालन करें।
क्या घर के अंदर रहना पूरी तरह सुरक्षित है?
घर के अंदर रहना बाहर की प्रदूषित हवा के संपर्क को कम कर सकता है, लेकिन इससे पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। दरवाजों, खिड़कियों और वेंटिलेशन के जरिए बाहरी प्रदूषण घर में आ सकता है। खाना पकाने का धुआं, अगरबत्ती, धूम्रपान या अन्य स्रोत भी घर के भीतर की हवा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए प्रदूषण के दिनों में घर के भीतर धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचना और वेंटिलेशन तथा एयर फिल्ट्रेशन पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
केवल अस्थायी पाबंदियों से नहीं सुलझेगी प्रदूषण की समस्या
GRAP-II प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एक जरूरी कदम है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ करने के लिए लंबे समय तक चलने वाली नीतियों की भी जरूरत है। वाहन उत्सर्जन, निर्माण और सड़क की धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा प्रबंधन तथा क्षेत्रीय प्रदूषण स्रोतों पर लगातार कार्रवाई जरूरी है।
प्रदूषण का स्तर मौसम पर भी निर्भर करता है। कम हवा और तापमान संबंधी परिस्थितियों में प्रदूषक जमीन के पास फंस सकते हैं। इसलिए प्रतिबंधों के साथ-साथ प्रदूषण के स्रोतों को कम करना और एजेंसियों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर में GRAP-II लागू होने का मकसद हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण के असर को कम करना है। सड़क की सफाई, धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन में बढ़ोतरी और डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियंत्रण जैसे कदम तभी प्रभावी होंगे, जब उनका सख्ती से पालन किया जाए।
नागरिकों के लिए भी जरूरी है कि वे AQI पर नजर रखें, प्रदूषण के दौरान अनावश्यक बाहरी गतिविधियां कम करें और सांस संबंधी लक्षणों को गंभीरता से लें। साफ हवा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरत है।
स्वास्थ्य संबंधी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। लक्षण बने रहने या बिगड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।





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