News Desk: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ के मामले में अदालत ने सात आरोपियों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। शनिवार शाम हुए इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 25 लोग घायल हुए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और भीड़ को नियंत्रित करने में कहां चूक हुई।
पूजा समिति के पदाधिकारी समेत 7 गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में पूजा समिति के सचिव राज कुमार सेवड़ा और उपाध्यक्ष शांतनु दुबे को गिरफ्तार किया है। इनके अलावा पंडाल का बांस का ढांचा बनाने वाले बिप्लब मुखर्जी, भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल रहे कौशिक साहा और पिंटू डे तथा निजी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सुमन चक्रवर्ती और राजेश पाल भी गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या से जुड़े आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आयोजन के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं।
‘पंडाल गिर रहा है’ के ऐलान से मची अफरा-तफरी?
जांच में लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा अहम कड़ी बनकर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, लोगों को पंडाल से बाहर निकलने के लिए कहा गया और ढांचा गिरने की चेतावनी दी गई। इस घोषणा के बाद भीड़ में घबराहट बढ़ने और भगदड़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि घोषणा किसने की, उसके पीछे क्या वजह थी और क्या इससे भीड़ में अचानक दबाव बढ़ा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी शुरुआती जानकारी के आधार पर कहा कि निजी सुरक्षा एजेंसी की घोषणा और सीटी बजाए जाने के बाद भीड़ में अफरा-तफरी फैली। हालांकि, घटना के सटीक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
संकरे रास्ते और भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
पुलिस की शुरुआती जांच में कथित तौर पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की कमी, संकरे प्रवेश और निकास मार्ग तथा भीड़ प्रबंधन की स्पष्ट योजना न होने जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। भारी बारिश के दौरान पंडाल के अंदर और बाहर मौजूद लोगों के बीच दबाव बढ़ने से हालात और बिगड़ने की बात भी सामने आई है।
मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख और नौकरी का ऐलान
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों को ₹5 लाख की सहायता देने और उनके इलाज का खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाने की बात भी कही गई है। घटना की जांच के लिए हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में तथ्य-जांच समिति गठित करने की घोषणा की गई है।
इस हादसे के बाद कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सात आरोपियों की पुलिस हिरासत के दौरान जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि हादसे के लिए कौन-सी चूक जिम्मेदार थी और क्या इसे रोका जा सकता था।





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