News Desk: दुनिया में एक तरफ करोड़ों लोग पर्याप्त भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हर साल अरबों टन खाना बर्बाद हो जाता है। यह सिर्फ खाने को कूड़ेदान में फेंकने की समस्या नहीं है, बल्कि पानी, जमीन, ऊर्जा और मेहनत की बर्बादी भी है। इसी गंभीर मुद्दे पर हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) मनाया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की 2024 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 में दुनिया भर में घरों, रेस्तरां और खुदरा दुकानों से लगभग 105 करोड़ टन खाना बर्बाद हुआ। यह उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का करीब 19 प्रतिशत था। ऐसे में सवाल है कि आखिर किन देशों में भोजन की बर्बादी रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं और भारत इस मामले में कहां खड़ा है?
1. दुनिया में हर साल कितना खाना बर्बाद होता है?
UNEP की Food Waste Index Report 2024 के अनुसार, वर्ष 2022 में खाद्य बर्बादी का आंकड़ा चौंकाने वाला था।
- 105 करोड़ टन: घरों, खाद्य सेवा क्षेत्र और खुदरा दुकानों में बर्बाद हुआ भोजन।
- 19 प्रतिशत: उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का वह हिस्सा जो बर्बाद हुआ।
- 79 किलोग्राम: दुनिया में प्रति व्यक्ति सालाना घरेलू खाद्य बर्बादी का अनुमान।
- 13 प्रतिशत: खेत से खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले खाद्य आपूर्ति में होने वाले नुकसान का अनुमान।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खाद्य बर्बादी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी घरों की थी। घरेलू स्तर पर करीब 63.1 करोड़ टन, खाद्य सेवा क्षेत्र में 29 करोड़ टन और खुदरा दुकानों में 13.1 करोड़ टन खाना बर्बाद हुआ।
यानी समस्या सिर्फ शादी समारोहों, होटलों या रेस्तरां में बचने वाले खाने तक सीमित नहीं है। घरों में जरूरत से ज्यादा खाना बनाना, खराब भंडारण और खरीदे गए खाद्य पदार्थों का समय पर इस्तेमाल नहीं करना भी इसके बड़े कारण हैं।
2. खाने की बर्बादी में कौन से देश आगे हैं?
किस देश में सबसे ज्यादा खाना बर्बाद होता है, इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि तुलना कुल मात्रा के आधार पर की जा रही है या प्रति व्यक्ति बर्बादी के आधार पर।
TV9 हिंदी की रिपोर्ट में दिए गए देशवार अनुमानों के मुताबिक, चीन में सालाना खाद्य बर्बादी लगभग 10.9 करोड़ टन और भारत में करीब 7.8 करोड़ टन बताई गई है। उसी सूची में अमेरिका का अनुमान लगभग 2.5 करोड़ टन और मिस्र का करीब 1.8 करोड़ टन है।
हालांकि, इन आंकड़ों को सावधानी से समझना जरूरी है। अलग-अलग देशों में भोजन की बर्बादी मापने के तरीके और उपलब्ध आंकड़ों की गुणवत्ता अलग-अलग है। इसलिए इन अनुमानों के आधार पर सभी देशों की बिल्कुल सटीक रैंकिंग तय करना उचित नहीं होगा।
3. फ्रांस: खाने योग्य भोजन फेंकने के बजाय दान करने पर जोर
फ्रांस ने वर्ष 2016 में खाद्य बर्बादी कम करने के लिए महत्वपूर्ण कानून बनाया। इसके तहत बड़े खाद्य खुदरा विक्रेताओं को खाने योग्य बचा हुआ भोजन नष्ट करने के बजाय उसे दान करने की व्यवस्था की दिशा में काम करना होता है। इसके लिए खाद्य सहायता संगठनों के साथ समझौते करने का प्रावधान भी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि सुरक्षित और खाने योग्य भोजन कचरे में जाने के बजाय जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी है।
फ्रांस का मॉडल इस विचार पर आधारित है कि भोजन की बर्बादी रोकने के लिए केवल लोगों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारों की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।
4. दक्षिण कोरिया: जितना खाद्य कचरा, उसी हिसाब से शुल्क
दक्षिण कोरिया ने खाद्य कचरे को अलग इकट्ठा करने और उसका पुनर्चक्रण करने की व्यवस्था विकसित की है। कई जगहों पर लोगों से उनके द्वारा निकाले गए खाद्य कचरे की मात्रा के आधार पर शुल्क लिया जाता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को जरूरत के अनुसार भोजन खरीदने और बचा हुआ खाना कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। एकत्रित खाद्य कचरे का उपयोग निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत खाद या अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने में भी किया जा सकता है।
दक्षिण कोरिया का उदाहरण दिखाता है कि नियमों के साथ आर्थिक प्रोत्साहन और कचरे के प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था भी खाद्य बर्बादी कम करने में भूमिका निभा सकती है।
5. चीन: रेस्तरां में जरूरत से ज्यादा खाना ऑर्डर करने पर रोक लगाने की कोशिश
चीन ने 2021 में खाद्य बर्बादी रोकने के लिए कानून लागू किया। इसके तहत रेस्तरां और खाद्य कारोबारों को भोजन की बर्बादी घटाने के लिए कदम उठाने तथा ग्राहकों को जरूरत से ज्यादा खाना ऑर्डर करने से हतोत्साहित करने जैसे उपाय करने होते हैं।
कुछ परिस्थितियों में नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इस कानून का उद्देश्य भोजन के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देना और व्यावसायिक स्तर पर होने वाली बर्बादी कम करना है।
6. जापान और सिंगापुर: कचरे का बेहतर प्रबंधन
जापान में खाद्य कारोबारों के लिए खाद्य अपशिष्ट कम करने और उसके इस्तेमाल को बेहतर बनाने से जुड़े नियम मौजूद हैं। वहां खाद्य कचरे को पशु आहार या खाद के रूप में उपयोग करने और संसाधनों की बर्बादी घटाने पर जोर दिया जाता है।
सिंगापुर में भी कुछ बड़े खाद्य अपशिष्ट पैदा करने वाले व्यावसायिक परिसरों के लिए कचरे को अलग इकट्ठा करने और उसके उपचार की व्यवस्था करना जरूरी है। हालांकि, ये नियम सभी व्यवसायों पर समान रूप से लागू नहीं होते; उनकी प्रयोज्यता संबंधित परिसर के आकार और गतिविधियों पर निर्भर करती है।
7. क्या भारत में खाना बर्बाद करने पर जेल हो सकती है?
भारत में खाद्य सुरक्षा, कचरा प्रबंधन और भोजन के दान से संबंधित अलग-अलग नियम और व्यवस्थाएं हैं। लेकिन सामान्य तौर पर घर में खाना बच जाने या उसे फेंक देने को अपने आप जेल योग्य अपराध मानना सही नहीं होगा।
दूसरे देशों की तरह भारत में भी खाद्य बर्बादी घटाने के लिए भोजन दान, जागरूकता, बेहतर भंडारण और खाद्य कचरे के उचित प्रबंधन की भूमिका अहम है। हालांकि, किसी खास मामले में कानूनी जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-सा कानून लागू होता है और क्या उसका उल्लंघन हुआ है।
इसलिए यह कहना कि दुनिया में कहीं भी खाद्य बर्बादी पर सख्त दंड का प्रावधान नहीं है, पूरी तरह सही नहीं होगा। फ्रांस और चीन जैसे देशों में कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में दंडात्मक प्रावधान मौजूद हैं।
8. खाने की बर्बादी का पर्यावरण और भूख से क्या संबंध है?
भोजन को उगाने से लेकर थाली तक पहुंचाने में पानी, जमीन, ऊर्जा, ईंधन, पैकेजिंग और श्रम लगता है। जब खाना फेंका जाता है, तो ये संसाधन भी व्यर्थ हो जाते हैं।
इसके अलावा, लैंडफिल में सड़ने वाला जैविक कचरा मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें छोड़ सकता है, जो जलवायु परिवर्तन में योगदान देती हैं।
भूख की समस्या भी इस मुद्दे का मानवीय पहलू है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 73.3 करोड़ लोग भूख से प्रभावित थे। इसका अर्थ यह नहीं कि बर्बाद होने वाला हर निवाला सीधे किसी भूखे व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है, लेकिन सुरक्षित भोजन का बेहतर वितरण और बर्बादी में कमी खाद्य सुरक्षा के प्रयासों को मजबूत कर सकते हैं।
9. घर से कैसे शुरू हो सकती है खाने की बर्बादी कम करने की पहल?
खाद्य बर्बादी रोकने के लिए बड़े कानूनों के साथ रोजमर्रा की आदतें बदलना भी जरूरी है।
- जरूरत के अनुसार खरीदारी करें: सप्ताह के भोजन की योजना बनाएं और उसी हिसाब से सामान खरीदें।
- बचे हुए खाने को सुरक्षित रखें: भोजन को सही तापमान पर स्टोर करें और समय रहते इस्तेमाल करें।
- समारोहों में मात्रा का ध्यान रखें: मेहमानों की संख्या के अनुसार भोजन तैयार करें।
- खाने योग्य भोजन दान करें: जहां सुरक्षित और व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध हो, वहां बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाएं।
- खाद्य कचरे को अलग रखें: स्थानीय नियमों के अनुसार जैविक कचरे का निपटान और कंपोस्टिंग करें।
निष्कर्ष: भोजन की बर्बादी रोकना सिर्फ नैतिक नहीं, पर्यावरणीय जरूरत भी
विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भोजन की समस्या केवल उत्पादन बढ़ाने से हल नहीं होगी। जो खाना पहले से उपलब्ध है, उसका सही भंडारण, वितरण और इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है।
फ्रांस में भोजन दान को बढ़ावा देने वाले नियम, दक्षिण कोरिया में खाद्य कचरे की मात्रा के आधार पर शुल्क और चीन में खाद्य बर्बादी रोकने के उपाय अलग-अलग मॉडल प्रस्तुत करते हैं। भारत के लिए भी बेहतर आपूर्ति व्यवस्था, सुरक्षित भोजन दान, जागरूकता और स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
आखिरकार, भोजन की असली कीमत सिर्फ उसकी खरीद में नहीं, बल्कि उसे उगाने में लगे पानी, मेहनत और संसाधनों में भी है। बर्बादी कम करना इन संसाधनों का सम्मान करने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम है।





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