News Desk: हिमालयी देश नेपाल में एक बार फिर भीषण बाढ़ ने तबाही मचा दी है। गोरखा जिले में बुढ़ीगंडकी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से दर्जनों घर, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे बह गए। एक जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक, कम से कम 5 लोग लापता हैं, जबकि सेना ने 49 लोगों को सुरक्षित बचाया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है।
यह घटना ऐसे समय हुई है, जब नेपाल अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ और उससे हुए भारी नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है।
कैसे आई अचानक बाढ़? भूस्खलन बना वजह
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोरखा जिले के चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र में भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और अवरोध टूटने के बाद अचानक तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ गया।
इस घटना में बुढ़ीगंडकी नदी का पानी अपने साथ मिट्टी, गाद और मलबा लेकर बहा। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नदी का पानी गहरे काले और धूसर रंग का दिखाई दिया। तेज बहाव के कारण नदी किनारे बसी बस्तियों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, नदी का प्रवाह किस स्थान पर और किस तरह बाधित हुआ, इसकी विस्तृत जांच जारी है।
दर्जनों घर तबाह, पुल और जलविद्युत परियोजना भी प्रभावित
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में 35 से अधिक घर बहने या नष्ट होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के स्थानीय मीडिया ने कुछ प्रभावित बस्तियों में 35 से 40 घरों के बहने का अनुमान दिया है।
कई पुल भी पानी के तेज बहाव में बह गए। इनमें पैदल यात्रियों के लिए बने सस्पेंशन पुल और एक सड़क पुल शामिल हैं। जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल को नुकसान पहुंचने के साथ वहां मौजूद कुछ उपकरण भी बह गए। बिजली और संचार से जुड़ी संरचनाओं पर भी असर पड़ा है।
फिलहाल नुकसान का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है। अलग-अलग इलाकों से मिल रही जानकारी के आधार पर प्रशासन स्थिति का आकलन कर रहा है।
5 लोग लापता, सेना ने शुरू किया बचाव अभियान
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पांच लोग लापता बताए गए हैं। नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर और जमीनी टीमों की मदद से 49 लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल है, हालांकि उसकी राष्ट्रीयता सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रशासन ने गोरखा और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस और सेना की टीमें राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के नजदीक न जाएं और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।
कई जिलों में अलर्ट, लोगों को ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सलाह
बुढ़ीगंडकी नदी में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया है।
गोरखा के अलावा धादिंग, तनहुँ, चितवन और नवलपरासी के पूर्वी तथा पश्चिमी क्षेत्रों में भी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया है। अधिकारियों ने लोगों को निचले इलाकों से निकलकर ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
इसका कारण यह है कि नदी में पानी का बहाव लगातार बदल सकता है और अचानक बढ़ा जलस्तर नीचे की ओर बसे इलाकों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
अगस्त की त्रासदी के बाद नेपाल पर फिर संकट
नेपाल अभी अगस्त में आई एक भीषण बाढ़ के प्रभावों से उबर नहीं पाया है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उस आपदा में नेपाल में 1,457 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग लापता बताए गए थे। उस घटना के बाद से ही नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे को बहाल करने की चुनौती बनी हुई है। अब गोरखा में आई नई बाढ़ ने प्रभावित समुदायों के सामने एक और संकट खड़ा कर दिया है।
आगे क्या चुनौती होगी?
नेपाल के प्रशासन के सामने फिलहाल तीन बड़ी प्राथमिकताएं हैं, लापता लोगों की तलाश, जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना और क्षतिग्रस्त पुलों व सड़कों के कारण प्रभावित बस्तियों तक सहायता पहुंचाना।
पहाड़ी इलाकों में पुलों और सड़कों का टूटना राहत कार्य को कठिन बना सकता है। इसलिए आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर, संभावित भूस्खलन और नीचे की ओर बसे गांवों की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है- लापता लोगों की तलाश करना और नदी किनारे रहने वाले लोगों को किसी और नुकसान से बचाना।





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