News Desk: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर महाराज को Z+ सुरक्षा देने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में उठी है, जब उनके आश्रम से जुड़े एक शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और दो नाबालिगों के लापता होने से जुड़े मामले चर्चा में हैं।
हालांकि, प्रेमानंद महाराज को वास्तव में किसी से जान का खतरा है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। सुरक्षा की मांग करने वालों ने आश्रम के भीतर कथित गुटबाजी और जमीन से जुड़े विवादों को लेकर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
1. प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा के लिए CM योगी को पत्र
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी की 6 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के प्रमुख दिनेश शर्मा ने 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी।
शर्मा ने दावा किया कि आश्रम से जुड़े कुछ लोगों के बीच दो गुट बन गए हैं। उनके आरोपों के मुताबिक, एक समूह साधना और सेवा से जुड़ा है, जबकि दूसरे पर जमीन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस कथित विवाद के कारण प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
शर्मा ने आश्रम के आसपास की गतिविधियों की जांच कराने और वहां काम करने वाले सेवादारों का पुलिस सत्यापन कराने की मांग भी की।
महत्वपूर्ण बात: ये आरोप और आशंकाएं पत्र लिखने वाले व्यक्ति के दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में प्रेमानंद महाराज की जान पर खतरे की किसी आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख नहीं है।
2. शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत से उठे सवाल
प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण, जिनका वास्तविक नाम दीपक लोधी बताया गया है, की 25 सितंबर 2026 को मथुरा में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को घटनास्थल से जुड़े CCTV फुटेज और शिष्य के कमरे से एक ग्राइंडर मिला था। पोस्टमॉर्टम में शरीर पर कई चोटों के निशान और कुछ गंभीर चोटों की पुष्टि हुई। इसके बाद उनके परिवार ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
28 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि वह मृतक के मोबाइल फोन, तस्वीरों और चैट्स की जांच कर रही है। परिवार ने मौत को लेकर संदेह जताया, जबकि एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट को पत्र लिखा।
3 अक्टूबर को श्री राधा केली कुंज ट्रस्ट ने बयान जारी कर दुख व्यक्त किया और पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कही। ट्रस्ट ने लोगों से अफवाहें नहीं फैलाने की अपील भी की।
फिलहाल इस घटना की परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच के निष्कर्षों को ही निर्णायक माना जाना चाहिए। मौत के कारणों या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका के बारे में जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
3. दो नाबालिगों के लापता होने के मामले में क्या सामने आया?
आश्रम से जुड़े विवाद के बीच दो नाबालिगों के लापता होने की खबरों ने भी ध्यान खींचा।
- अनुज चौधरी: हाथरस का रहने वाला 17 वर्षीय अनुज जुलाई 2026 से लापता बताया गया था। 2 अक्टूबर को उसके बरसाना के एक आश्रम में मिलने की खबर आई। उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि उसे तलाशने के दौरान आश्रम से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
- मयंक चौहान: कासगंज का रहने वाला नाबालिग मयंक 5 अक्टूबर को प्रयागराज में साधु के वेश में मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, उसका परिवार भी आश्रम के बाहर प्रदर्शन करने वाले लोगों में शामिल था।
इसके अलावा, नोएडा की एक 25 वर्षीय महिला के परिवार ने भी उसके लापता होने की शिकायत पुलिस से की थी। परिवार का कहना था कि महिला प्रेमानंद महाराज की अनुयायी थी। हालांकि, पुलिस ने कहा कि आश्रम की विजिटर बुक में उसके आने-जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला।
इन मामलों को एक ही कथित साजिश का हिस्सा मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण सामने आना जरूरी है। किसी व्यक्ति के लापता होने, उसके आश्रम में आने-जाने या उसके परिवार के आरोपों से अपने आप किसी संस्था या व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं होती।
4. आश्रम में गुटबाजी और जमीन से जुड़े आरोप
दिनेश शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रेमानंद महाराज के आसपास दो गुट सक्रिय हैं और कुछ लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर जमीन से जुड़ी गतिविधियां कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित विवाद के कारण महाराज को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य या किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं हैं। प्रेमानंद महाराज के आश्रम की ओर से भी इन विशिष्ट आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया रिपोर्ट में दर्ज नहीं थी।
इसलिए आश्रम में जमीन पर कब्जे, बच्चों के खिलाफ अपराध या किसी कथित माफिया समूह की मौजूदगी जैसे गंभीर आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इनकी पुष्टि के लिए पुलिस जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष जरूरी है।
5. Z+ सुरक्षा क्या है और इसकी मांग क्यों अहम है?
भारत में Z+ सुरक्षा उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। किसी व्यक्ति को किस स्तर की सुरक्षा दी जानी चाहिए, इसका निर्धारण खतरे के आकलन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा के आधार पर किया जाता है।
प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग उठना और सरकार की ओर से ऐसी सुरक्षा मंजूर किया जाना दो अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में मांग का उल्लेख है, लेकिन Z+ सुरक्षा मंजूर किए जाने का कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही होगा कि प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई है; यह पुष्टि नहीं हुई है कि उन्हें Z+ सुरक्षा प्रदान कर दी गई है।
निष्कर्ष: सुरक्षा की मांग के बीच जांच और आधिकारिक जवाब अहम
प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के पीछे शिष्य की मौत, नाबालिगों से जुड़े मामले और आश्रम के भीतर कथित गुटबाजी के आरोप हैं। इन घटनाओं ने उनके अनुयायियों और स्थानीय धार्मिक समुदाय के बीच चिंता बढ़ाई है।
अब तीन सवालों के जवाब अहम हैं: क्या राज्य सरकार सुरक्षा की मांग पर कोई फैसला लेती है? क्या पुलिस जांच से शिष्य की मौत की परिस्थितियों और अन्य शिकायतों पर स्पष्टता आती है? और क्या आश्रम से जुड़े आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सामने आते हैं?
फिलहाल Z+ सुरक्षा की मांग एक ज्ञापन और आशंका के रूप में सामने आई है, न कि किसी पुष्ट खतरे या सरकार द्वारा सुरक्षा मंजूर किए जाने की आधिकारिक घोषणा के रूप में।





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