News Desk: भारत में UPI अब सिर्फ पैसे भेजने का माध्यम नहीं, बल्कि देश की digital economy की रीढ़ बन चुका है। लेकिन 15 अक्टूबर 2026 से इसके बड़े merchant transactions के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI payments पर 0.4% Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा। अनुमान है कि इससे payment ecosystem में सालाना करीब ₹15,000 करोड़ का revenue pool बन सकता है।
लेकिन सवाल है, जब सिर्फ करीब 4% merchant UPI transactions ₹2,000 से ऊपर हैं, तो ₹15,000 करोड़ कैसे?
4% ट्रांजैक्शन, लेकिन 66% पैसा!
यहीं पूरी कहानी छिपी है।
वित्त वर्ष 2025-26 में UPI पर करीब 24,162 करोड़ transactions हुए। इनमें लगभग 63% यानी करीब 15,200 करोड़ transactions P2M थे, यानी किसी व्यक्ति ने दुकान, कंपनी या service provider को payment किया।
इन merchant transactions में सिर्फ करीब 4% ₹2,000 से ज्यादा के थे। लेकिन इन 4% transactions में P2M payment value का लगभग 66% पैसा शामिल था।
यानी संख्या कम है, लेकिन रकम बहुत बड़ी है।
इसी बड़े-value segment पर MDR लगाकर payment ecosystem के लिए revenue पैदा करने की योजना है।
₹10,000 की UPI Payment पर कितना MDR?
मान लीजिए आपने किसी merchant को ₹10,000 UPI से दिए।
0.4% MDR = ₹40
यह शुल्क merchant-side payment ecosystem में लागू होगा। सरकार के मुताबिक इसे सीधे consumer से वसूलने की व्यवस्था नहीं है और banks को merchants द्वारा यह लागत ग्राहकों पर डालने से रोकने की सलाह दी गई है। UPI apps को अलग से hidden/platform fee लगाने की भी अनुमति नहीं है।
लेकिन व्यवहार में merchants इस लागत को absorb करेंगे या किसी तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे—यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण सवाल रहेगा।
₹75,000 से ऊपर क्या होगा?
यहां भी एक cap रखा गया है।
₹75,000 से ज्यादा के eligible merchant UPI transactions पर 0.4% की गणना के बजाय MDR अधिकतम ₹300 प्रति transaction तक सीमित रहेगा।
उदाहरण के लिए:
- ₹5,000 payment → ₹20 MDR
- ₹10,000 → ₹40
- ₹50,000 → ₹200
- ₹75,000 → ₹300
- ₹1 लाख → 0.4% के हिसाब से ₹400 नहीं, बल्कि ₹300 cap
हर UPI Payment पर चार्ज नहीं लगेगा
सबसे जरूरी बात यही है।
Person-to-Person यानी P2P payments पूरी तरह free रहेंगे, चाहे रकम ₹2,000 हो या ₹2 लाख। दोस्त, परिवार या किसी व्यक्ति को पैसे भेजने पर MDR नहीं लगेगा।
₹2,000 तक के सामान्य merchant payments भी free रहेंगे।
इसके अलावा छोटे merchants और कुछ specified sectors को भी exemption या concessional rates मिलेंगे। Railway, telecom, insurance, fuel, utility bills, education और agricultural inputs जैसे essential categories के लिए अलग ₹5 MDR व्यवस्था रखी गई है। Securities और mutual-fund related payments के लिए 0.02% MDR का प्रावधान है।
फिर ₹15,000 करोड़ आएंगे कहां से?
असल में इसे सरकार की ₹15,000 करोड़ की सीधी कमाई समझना गलत होगा।
MDR payment ecosystem में distribute होगा—इसमें acquiring banks, payment aggregators, fintech/payment apps और दूसरे participants शामिल होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो tax है और न ही सरकार या NPCI द्वारा collected revenue है।
Indian Express के मुताबिक करीब ₹15,000 करोड़ का annual revenue pool बनने का अनुमान है। वहीं कुछ brokerage estimates इससे भी ज्यादा, करीब ₹20,000-20,600 करोड़ तक का industry revenue pool बताते हैं।
सरकार UPI पर MDR क्यों ला रही है?
UPI के पीछे बड़ा digital infrastructure है, servers, cybersecurity, fraud prevention, payment processing और लगातार capacity upgrades।
आज UPI पर हर महीने अरबों transactions हो रहे हैं। अगस्त 2026 में ही UPI ने करीब 24,509 million यानी 2,450.9 करोड़ transactions process किए, जिनकी कुल value करीब ₹29.82 लाख करोड़ थी।
सरकार का तर्क है कि इतने बड़े ecosystem को लंबे समय तक zero-MDR मॉडल पर चलाना वित्तीय रूप से sustainable नहीं है।
आम आदमी पर असली असर क्या होगा?
सरकार के अनुसार करीब 96% P2M transactions इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। P2P transactions तो रकम की परवाह किए बिना free रहेंगे।
लेकिन बड़ा सवाल अभी भी बाकी है, क्या merchant इस लागत को खुद उठाएगा या अंततः product/service की कीमत में शामिल कर देगा?
यही वजह है कि UPI का नया MDR framework सिर्फ payment system में बदलाव नहीं है। यह भारत के उस digital-payment model में बड़ा परिवर्तन है, जिसने वर्षों तक “scan करो और pay करो- कोई extra charge नहीं” वाली आदत बना दी थी।
अब 15 अक्टूबर से सवाल यह नहीं रहेगा कि UPI free है या नहीं, बल्कि यह होगा कि इसकी लागत आखिर कौन उठाता है—merchant, payment ecosystem या अप्रत्यक्ष रूप से consumer?





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