News Desk: जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व पर 2024 के विधानसभा चुनावों में जनता से किए गए वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया। रुहुल्लाह ने कहा कि पार्टी ने लोगों के “गुस्से, भावनाओं और भारी जनादेश” के साथ विश्वासघात किया है।
रुहुल्लाह ने मंगलवार, 3 नवंबर को बडगाम में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं बरसी पर आयोजित एक सभा में इस्तीफे की घोषणा की। उनका यह फैसला नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ करीब 24 साल के जुड़ाव को खत्म करता है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद श्रीनगर सीट पर उपचुनाव का रास्ता खुल सकता है।
2024 के चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप
रुहुल्लाह मेहदी ने अपने इस्तीफे के साथ पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2024 के विधानसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए प्रमुख वादों को पूरा नहीं किया।
उन्होंने खास तौर पर अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक कैदियों की रिहाई, आरक्षण नीति में बदलाव और लोगों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। रुहुल्लाह के मुताबिक, चुनाव के दौरान पार्टी ने इन मुद्दों पर संघर्ष का भरोसा दिया था, लेकिन चुनाव के बाद उसका रुख बदल गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने जनता के जनादेश को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के लिए इस्तेमाल किया और फिर उन वादों से दूरी बना ली। ये आरोप रुहुल्लाह के हैं; पार्टी की ओर से इस मामले पर अलग प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
उमर अब्दुल्ला पर सीधे निशाने
रुहुल्लाह ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन कर रहे छात्रों और जेलों में बंद युवाओं की चिंताओं का जिक्र किया।
उनका कहना था कि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपेक्षा की गई थी, लेकिन लोगों को अपेक्षित जवाब नहीं मिला। रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने और सत्ता में आने के बाद अपने पुराने रुख को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
पिता की बरसी पर इस्तीफे का ऐलान
रुहुल्लाह ने इस्तीफे के लिए 3 नवंबर की तारीख चुनी, जो उनके पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं बरसी है। उनके पिता की 2000 में आतंकवादियों द्वारा किए गए विस्फोट में हत्या कर दी गई थी।
रुहुल्लाह ने बडगाम में सभा के दौरान अपने फैसले को राजनीतिक और नैतिक प्रतिबद्धता से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि वह अब पार्टी के साथ नहीं रह सकते, क्योंकि उनके अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने मूल राजनीतिक रुख और चुनावी वादों से दूर चली गई है।
क्या श्रीनगर सीट पर उपचुनाव होगा?
रुहुल्लाह ने पार्टी के साथ-साथ लोकसभा सदस्यता से भी इस्तीफा देने की घोषणा की है। अब इस इस्तीफे को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि इस्तीफा स्वीकार होता है, तो श्रीनगर संसदीय सीट खाली होगी और वहां उपचुनाव कराया जा सकता है।
रुहुल्लाह पहले भी संकेत दे चुके थे कि वह पार्टी छोड़ने के साथ-साथ संसद से इस्तीफा देंगे। अगस्त में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर अपने वैचारिक मतभेदों और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख पर सवाल उठाए थे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए राजनीतिक चुनौती
रुहुल्लाह मेहदी जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख शिया चेहरों में गिने जाते हैं। उनका पार्टी छोड़ना ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी नेतृत्व को चुनावी वादों, आरक्षण नीति और राज्य के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
उनके इस्तीफे से पार्टी के भीतर मतभेद और सार्वजनिक हो गए हैं। हालांकि, इस घटनाक्रम का सरकार की स्थिरता या आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह आगे की राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा।
निष्कर्ष: आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा से इस्तीफा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अहम घटनाक्रम है। उन्होंने उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व पर 2024 के जनादेश तथा चुनावी वादों से विश्वासघात का आरोप लगाया है। अब इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया और पार्टी की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।





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