News Desk: धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। त्योहारों पर खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है, लेकिन बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने खरीदारों के सामने सवाल खड़ा कर दिया है कि अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा या कीमतें और नीचे आने का इंतजार करना चाहिए।
मंगलवार, 3 नवंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के वायदा भाव में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई। सुबह करीब 11:50 बजे चांदी 5,155 रुपये टूटकर 1,78,624 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। वहीं, अक्टूबर के दौरान चांदी के वायदा भाव में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसी अवधि में सोने के वायदा भाव में लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई।
धनतेरस इस साल 6 नवंबर को मनाई जाएगी। भारतीय परंपरा में इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे में कीमतों में आई गिरावट ने त्योहार से पहले खरीदारी की रणनीति को चर्चा में ला दिया है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी?
सोने और चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल के रिकॉर्ड स्तर से करें तो दोनों धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी की कीमतों में गिरावट सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा रही है।
3 नवंबर को उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक:
· चांदी: MCX पर करीब 1,78,624 रुपये प्रति किलोग्राम। जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से इसमें लगभग 57 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
· सोना: MCX पर दिसंबर वायदा करीब 1,39,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 23 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
हालांकि, वायदा बाजार के भाव और ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाले खुदरा भाव में अंतर हो सकता है। स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज, शुद्धता और अन्य शुल्क के कारण ग्राहकों को अंतिम कीमत अलग चुकानी पड़ती है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
कीमती धातुओं की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीद-बिक्री का असर पड़ता है।
1. अमेरिकी ब्याज दरों की चिंता: बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ब्याज दरें ऊंची रहने या बढ़ने की संभावना से सोने जैसे ऐसे निवेश पर दबाव पड़ता है, जो नियमित ब्याज नहीं देते।
2. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी: वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। डॉलर में कीमत तय होने के कारण रुपये की विनिमय दर भी घरेलू भाव को प्रभावित करती है।
3. चांदी पर ज्यादा दबाव: सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसकी वजह यह है कि चांदी की मांग केवल निवेश और आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए औद्योगिक मांग और निवेशकों की धारणा दोनों इसकी कीमत को प्रभावित करते हैं।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना चाहिए?
अगर किसी परिवार को शादी, उपहार या पारंपरिक जरूरत के लिए सोना खरीदना है, तो मौजूदा गिरावट कुछ राहत दे सकती है। लेकिन केवल एक-दो दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि सोना अब सस्ता हो गया है या आगे इसकी कीमत नहीं गिरेगी।
Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज के मुताबिक, घरेलू सोने और चांदी की कीमतें रुपये-डॉलर की विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार की चाल से प्रभावित होती रहेंगी। उनके अनुसार, बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना जोखिम को संभालने में मदद कर सकता है।
इसका मतलब है कि जिन लोगों को खरीदारी की जरूरत है, वे अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खरीद सकते हैं। वहीं, केवल मुनाफे की उम्मीद से खरीदारी करने वालों को बाजार के जोखिम को समझना चाहिए।
सोने की ज्वेलरी, सिक्का या डिजिटल गोल्ड: क्या है बेहतर विकल्प?
धनतेरस पर सोना खरीदने का फैसला सिर्फ कीमत देखकर नहीं करना चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि आप सोना पहनने, उपहार देने या निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं।
1. सोने की ज्वेलरी: पहनने के लिए खरीदें
धनतेरस पर सोने के आभूषण सबसे लोकप्रिय खरीदारी में शामिल हैं। लेकिन ज्वेलरी खरीदते समय केवल सोने का भाव ही नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और GST भी देना पड़ता है। दोबारा बेचने पर ये अतिरिक्त खर्च आमतौर पर वापस नहीं मिलते।
खरीदारी से पहले BIS हॉलमार्क, शुद्धता और छह अंकों वाले HUID कोड की जांच जरूर करें। इसे BIS Care ऐप के जरिए भी सत्यापित किया जा सकता है।
2. सोने के सिक्के: पारंपरिक उपहार का विकल्प
अगर आप आभूषण नहीं पहनते और सिर्फ सोना खरीदना चाहते हैं, तो सिक्के एक विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, सिक्के खरीदते समय उनकी शुद्धता, वजन, मेकिंग या मिंटिंग प्रीमियम और भविष्य में बायबैक की शर्तें जरूर जांचें।
3. चांदी के सिक्के और बर्तन: कम बजट में खरीदारी
सोने के मुकाबले कम कीमत होने के कारण चांदी के सिक्के, मूर्तियां, दीये और बर्तन धनतेरस पर लोकप्रिय विकल्प हैं। लेकिन कम कीमत का मतलब कम जोखिम नहीं है। चांदी में भी तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है और हालिया गिरावट इसका उदाहरण है।
4. डिजिटल गोल्ड: छोटी रकम से खरीदारी
डिजिटल गोल्ड के जरिए ग्राहक छोटी रकम से भी सोना खरीद सकते हैं। SafeGold के संस्थापक और CEO गौरव माथुर ने NDTV को बताया कि कीमतों में गिरावट के बाद उनके प्लेटफॉर्म पर डिजिटल गोल्ड की खरीदारी सामान्य स्तर से 1.5 से 2 गुना तक पहुंच गई।
उन्होंने बताया कि कुछ ग्राहक हर महीने SIP के जरिए सोना खरीद रहे हैं और त्योहार के दिन छोटी रकम का पारंपरिक उपहार भी ले रहे हैं। हालांकि, डिजिटल गोल्ड को गोल्ड ETF के समान नहीं समझना चाहिए। डिजिटल गोल्ड उत्पादों पर SEBI-विनियमित प्रतिभूतियों जैसा नियामकीय ढांचा लागू नहीं होता। निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, सोने की कस्टडी, रिडेम्पशन और शुल्क की शर्तें समझना जरूरी है।
क्या सोने-चांदी की कीमतें आगे और गिर सकती हैं?
इस सवाल का निश्चित जवाब देना संभव नहीं है। कीमतों की आगे की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, रुपये की चाल, अंतरराष्ट्रीय मांग और निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
चांदी में हालिया गिरावट सोने के मुकाबले अधिक रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि इसमें तुरंत तेजी लौट आएगी। इसी तरह सोने का रिकॉर्ड स्तर से नीचे आना भी आगे की गिरावट की संभावना को खत्म नहीं करता।
विशेषज्ञों की सलाह है कि खरीदार अपनी जरूरत, बजट और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर फैसला करें। अगर खरीदारी जरूरी है तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी पर विचार किया जा सकता है।
धनतेरस पर खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
· दुकान पर सोने और चांदी का उसी दिन का भाव पूछें।
· ज्वेलरी की शुद्धता और BIS हॉलमार्क की जांच करें।
· HUID कोड को BIS Care ऐप से सत्यापित करें।
· मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और GST सहित अंतिम बिल समझें।
· सिक्के खरीदने से पहले बायबैक की शर्तें पूछें।
· डिजिटल गोल्ड में निवेश करने से पहले प्लेटफॉर्म के जोखिम और नियम समझें।
· केवल कीमत गिरने के आधार पर जल्दबाजी में निवेश न करें।
निष्कर्ष: धनतेरस से पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों को खरीदारी का नया मौका जरूर दिया है, लेकिन बाजार में अस्थिरता अभी बनी हुई है। अगर खरीदारी शादी, उपहार या पारंपरिक जरूरत के लिए है तो बजट के अनुसार खरीदारी की जा सकती है। वहीं, केवल निवेश और मुनाफे के उद्देश्य से खरीदने वालों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। इस धनतेरस पर सबसे जरूरी है कि खरीदारी शुभ मुहूर्त के साथ-साथ सही कीमत, शुद्धता और अपनी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर की जाए।





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