News Desk: भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने खुलासा किया है कि यूरोपियन बैडमिंटन टूर के दौरान भारतीय खिलाड़ियों को सरकारी फंडिंग नहीं मिली। इस फैसले से सिंधु भी हैरान रह गईं और उन्हें अपने कुछ खर्च खुद उठाने पड़े। हालांकि, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने फंडिंग रोकने के पीछे एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को वजह मानने से इनकार किया है।
SAI के मुताबिक, बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) निर्धारित समय-सीमा के भीतर जरूरी प्रस्ताव जमा नहीं कर पाया था, जिसके कारण खिलाड़ियों के लिए फंड जारी नहीं किया गया। इस घटनाक्रम ने भारतीय बैडमिंटन में खिलाड़ियों की आर्थिक सहायता और खेल संघों की प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फंडिंग रुकने पर हैरान थीं पीवी सिंधु
पीवी सिंधु ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि जब उन्हें फंडिंग नहीं मिलने की जानकारी मिली तो वह हैरान रह गई थीं। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने करियर में पहले कभी इस तरह की स्थिति का सामना नहीं किया था।
सिंधु ने कहा कि उस समय उनके सामने टूर्नामेंट में हिस्सा लेने या नहीं लेने का विकल्प था, लेकिन उनकी प्राथमिकता प्रतियोगिता में खेलना और अपने प्रदर्शन में सुधार करना था। उन्होंने कुछ खर्च खुद उठाए और उनके सहयोगी संगठन ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट (OGQ) ने भी आर्थिक मदद की।
सिंधु के मुताबिक, फंडिंग नहीं मिलने के बावजूद वह अपना ध्यान मैचों और खेल पर केंद्रित रखना चाहती थीं।
SAI ने फंडिंग रोकने की क्या वजह बताई?
SAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फंडिंग रोकने का फैसला एशियन गेम्स में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के प्रदर्शन से जुड़ा नहीं था। अधिकारी के अनुसार, BAI निर्धारित समय पर यूरोप टूर के लिए खिलाड़ियों के नाम सहित जरूरी प्रस्ताव जमा नहीं कर पाया था।
SAI ने बताया कि पहले खेल संघों को प्रस्ताव 90 दिन पहले और खिलाड़ियों के नाम 60 दिन पहले देने होते थे। संघों की मांग पर समय-सीमा में बदलाव कर इसे 30 दिन किया गया था। इसके बावजूद BAI की ओर से तय समय के भीतर जरूरी दस्तावेज नहीं मिले।
SAI के अधिकारी ने कहा कि नए नियम सभी खेल संघों पर समान रूप से लागू होते हैं और निर्धारित समय से पहले प्रस्ताव नहीं मिलने पर फंडिंग प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
चार देशों में होना था भारतीय खिलाड़ियों का मुकाबला
भारतीय बैडमिंटन टीम का यूरोपियन अभियान चार टूर्नामेंटों में शामिल था। इसमें फिनलैंड, डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी में प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं।
रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ियों को फिनलैंड में आर्कटिक ओपन शुरू होने से कुछ दिन पहले फंडिंग नहीं मिलने की जानकारी दी गई थी। BAI ने पहले टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था करने की बात कही थी, लेकिन बाकी प्रतियोगिताओं के दौरान यात्रा, भोजन और आवास समेत कई खर्च खिलाड़ियों को खुद उठाने पड़े।
इसका असर खिलाड़ियों के कोचिंग सपोर्ट पर भी पड़ा। कुछ खिलाड़ी अपने कोच को साथ नहीं ले जा सके। फ्रेंच ओपन में अश्मिता चालिहा के मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ी इशारानी बरुआ ने उनके कोच की भूमिका निभाई। वहीं, डेनमार्क ओपन में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं तान्वी शर्मा भी एक मुकाबले में कोच के बिना खेलीं।
एशियन गेम्स के प्रदर्शन से जोड़कर देखी गई फंडिंग कटौती
फंडिंग रोके जाने के बाद कुछ खेल अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि इसका संबंध एशियन गेम्स में भारत के प्रदर्शन से हो सकता है। ऐची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। भारत को व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक नहीं मिला था।
हालांकि, SAI ने इस आशंका को खारिज किया और दोहराया कि फंड जारी नहीं होने की वजह BAI की ओर से प्रस्ताव समय पर जमा नहीं करना था। इस तरह फंडिंग रुकने के कारण को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आए हैं।
खिलाड़ियों को पुराना खर्च वापस नहीं मिलेगा
SAI के अधिकारी के मुताबिक, आगामी टूर्नामेंटों के लिए फंडिंग फिर से शुरू की जाएगी। हालांकि, यूरोपियन अभियान के दौरान खिलाड़ियों ने जो खर्च अपनी जेब से किया है, उसकी भरपाई नहीं की जाएगी।
यह फैसला उन खिलाड़ियों के लिए अहम है, जिन्हें चार देशों में लगातार प्रतियोगिताओं के दौरान यात्रा और रहने सहित कई खर्च खुद उठाने पड़े। BAI के महासचिव संजय मिश्रा से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई, लेकिन उनका जवाब उपलब्ध नहीं हो सका।
फंडिंग की चुनौती के बीच सिंधु और लक्ष्य सेन ने जीते खिताब
यूरोप टूर के दौरान आर्थिक मुश्किलों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने जर्मनी के सारब्रुकन में आयोजित हाइलो ओपन सुपर 500 टूर्नामेंट में क्रमशः महिला और पुरुष सिंगल्स का खिताब जीता।
सिंधु ने इस साल अपना दूसरा BWF वर्ल्ड टूर खिताब हासिल किया, जबकि लक्ष्य सेन ने करीब एक साल से चले आ रहे खिताबी सूखे को खत्म किया। फ्रेंच ओपन में सिंधु उपविजेता रही थीं और अश्मिता चालिहा ने दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी अकाने यामागुची को हराकर भी ध्यान खींचा था।
सिंधु ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से खिलाड़ियों का ध्यान अपने लक्ष्य से नहीं हटना चाहिए। उनके लिए सबसे जरूरी अपने खेल में सुधार करना और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना था।
भारतीय खेल व्यवस्था के सामने उठे सवाल
इस पूरे मामले ने भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ SAI ने फंडिंग रुकने के लिए समय पर प्रस्ताव नहीं मिलने को जिम्मेदार बताया है, वहीं खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के बीच आर्थिक व्यवस्था खुद करनी पड़ी।
आगामी टूर्नामेंटों के लिए फंडिंग बहाल किए जाने की बात कही गई है, लेकिन यूरोप टूर के दौरान हुए खर्च की भरपाई नहीं होगी। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि BAI और SAI के बीच प्रस्ताव जमा करने और फंड जारी करने की प्रक्रिया को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के बीच इस तरह की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।





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