News Desk: अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स को कांग्रेस में बढ़त मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव से पहले ही ट्रंप ने संकेत दे दिया था कि अगर रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत गंवा देती है, तो वह डेमोक्रेट्स के विधेयकों को रोकने के लिए अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने इसके लिए खुद को ‘Mr Veto’ तक कह दिया था।
ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट के पॉडकास्ट ‘Pod Force One’ में बातचीत के दौरान कहा था कि डेमोक्रेट्स की ओर से भेजे गए विधेयकों को वह वीटो करेंगे। उनके मुताबिक, एक-दो महीने तक लगातार वीटो किए जाने के बाद विपक्ष बातचीत और समझौते के लिए उनके पास आएगा।
अब चुनाव के बाद अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने के संकेतों के बीच ट्रंप की यह चेतावनी चर्चा में है। सवाल है कि आखिर राष्ट्रपति के पास ऐसा कौन-सा अधिकार है, जिससे वह कांग्रेस के फैसलों को रोक सकते हैं? क्या वह हर बिल को वीटो कर सकते हैं और क्या कांग्रेस उनके फैसले को पलट सकती है?
क्या होता है राष्ट्रपति का वीटो पावर?
अमेरिका के संविधान के अनुच्छेद-1, सेक्शन-7 के तहत राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित विधेयक पर वीटो लगाने का अधिकार दिया गया है। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट- से किसी बिल के पारित होने के बाद उसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है।
राष्ट्रपति के सामने मुख्य रूप से तीन विकल्प होते हैं:
- बिल पर हस्ताक्षर करना: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद विधेयक कानून बन जाता है।
- वीटो लगाना: राष्ट्रपति बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर उसे आपत्तियों के साथ कांग्रेस के पास वापस भेज सकते हैं।
- हस्ताक्षर न करना: यदि राष्ट्रपति 10 दिनों के भीतर (रविवार को छोड़कर) बिल पर कोई कार्रवाई नहीं करते और कांग्रेस सत्र में है, तो निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बिल कानून बन सकता है।
इस तरह वीटो राष्ट्रपति को कांग्रेस के विधायी फैसले पर रोक लगाने का अधिकार देता है, लेकिन यह रोक हर परिस्थिति में अंतिम नहीं होती।
क्या कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है?
हां। अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के वीटो को पलटने का रास्ता भी दिया गया है। इसके लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
यानी अगर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों में किसी विधेयक के समर्थन में दो-तिहाई सदस्य वोट करते हैं, तो राष्ट्रपति के वीटो के बावजूद वह बिल कानून बन सकता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी सदन में 435 सदस्य मौजूद हैं और सभी मतदान करते हैं, तो हाउस में 290 वोट की जरूरत होगी। वहीं 100 सदस्यीय सीनेट में 67 वोट की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी सदस्य मतदान करें।
इसका मतलब है कि केवल साधारण बहुमत हासिल कर लेने से डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति के वीटो को आसानी से निष्प्रभावी नहीं कर पाएंगे। उन्हें दोनों सदनों में व्यापक समर्थन जुटाना होगा।
‘Mr Veto’ रणनीति से क्या हासिल करना चाहते हैं ट्रंप?
ट्रंप की चुनाव पूर्व टिप्पणी से संकेत मिलता है कि वह वीटो को केवल किसी एक विधेयक को रोकने के संवैधानिक अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि डेमोक्रेट्स के साथ बातचीत के दबाव के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा था कि विपक्ष लगातार विधेयक भेजेगा और वह उन्हें वीटो करते रहेंगे। कुछ समय बाद डेमोक्रेट्स को बातचीत के लिए आना पड़ेगा और दोनों पक्ष समझौता कर सकते हैं।
यह रणनीति अमेरिकी राजनीति में विभाजित सरकार की स्थिति को दर्शाती है, जहां राष्ट्रपति और कांग्रेस के किसी एक या दोनों सदनों पर अलग-अलग दलों का नियंत्रण हो सकता है। ऐसी स्थिति में बजट, टैक्स, इमिग्रेशन और सरकारी खर्च जैसे मुद्दों पर सहमति बनाना कठिन हो सकता है।
ट्रंप अब तक कितनी बार वीटो लगा चुके हैं?
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल में अब तक दो विधेयकों पर वीटो लगाया है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने 10 विधेयकों को वीटो किया था।
वीटो का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए असामान्य अधिकार नहीं है। हालांकि, जब राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों सदनों में अलग-अलग राजनीतिक दलों का नियंत्रण होता है, तब इस अधिकार का इस्तेमाल विधायी टकराव का बड़ा हिस्सा बन सकता है।
सिर्फ वीटो ही नहीं, ट्रंप के सामने और भी चुनौतियां
कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण बढ़ने से ट्रंप के सामने चुनौतियां केवल विधेयकों को लेकर नहीं होंगी। प्रतिनिधि सभा में विपक्षी दल को समितियों और सरकारी कामकाज की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है।
डेमोक्रेट्स प्रशासन के फैसलों, सरकारी नीतियों और संभावित हितों के टकराव जैसे मामलों पर जांच शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा सीनेट की भूमिका राष्ट्रपति की ओर से नामित कई वरिष्ठ अधिकारियों, राजदूतों और संघीय न्यायाधीशों की नियुक्तियों की पुष्टि में भी अहम होती है। डेमोक्रेट्स इन नियुक्तियों पर सवाल उठा सकते हैं या प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
हालांकि, राष्ट्रपति के पास कार्यकारी आदेश जारी करने जैसी शक्तियां बनी रहेंगी। लेकिन कार्यकारी आदेश कानून का विकल्प नहीं होते। उन्हें अदालत में चुनौती दी जा सकती है और भविष्य की सरकार उन्हें बदल या वापस ले सकती है।
क्या अमेरिका में बढ़ेगा व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव?
मिडटर्म चुनावों के बाद अमेरिकी राजनीति में अगले दो वर्षों के दौरान राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे और उनके पास कार्यपालिका से जुड़ी व्यापक शक्तियां होंगी, लेकिन डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली कांग्रेस उनके विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में बाधा बन सकती है।
ऐसे में ‘Mr Veto’ की चेतावनी केवल एक चुनावी बयान नहीं रह जाती, बल्कि यह बताती है कि ट्रंप और विपक्ष के बीच आने वाले समय में विधेयकों, सरकारी खर्च, नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर संघर्ष किस तरह सामने आ सकता है।
अंततः अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्तियों का संतुलन बनाए रखने के लिए वीटो और वीटो को पलटने, दोनों की व्यवस्था करता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप इस अधिकार का कितना इस्तेमाल करते हैं और कांग्रेस उनके फैसलों के जवाब में किस तरह की रणनीति अपनाती है।





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