News Desk: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। NDTV की 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीनों संदिग्ध शूटरों को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी ट्रेन से सफर कर रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दो आरोपी हरियाणा और एक महाराष्ट्र से है। पुलिस अब हमले की साजिश, मकसद और आरोपियों के नेटवर्क की जांच कर रही है।
कोटा रेलवे स्टेशन पर कैसे पकड़े गए आरोपी?
रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई में फायरिंग की घटना के बाद तीनों संदिग्ध वहां से फरार हो गए थे। पुलिस ने उनकी तलाश में अलग-अलग जगहों पर जांच शुरू की। आखिरकार राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर उन्हें पकड़ लिया गया।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों को मुंबई से दिल्ली की ओर जा रही ट्रेन में पकड़ा गया। जांच एजेंसियां अब उनके सफर, घटनास्थल से भागने के रास्ते और वारदात के बाद की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।
दो हरियाणा से, तीसरे की पहचान को लेकर रिपोर्टों में अंतर
मीडिया रिपोर्टों में आरोपियों की पहचान को लेकर जानकारी सामने आई है। आज तक ने दो आरोपियों की पहचान ऋतिक कुमार उर्फ रोशन और रेहान के रूप में बताई है, जबकि तीसरे आरोपी के नाबालिग होने की बात कही है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी एक आरोपी की उम्र 17 वर्ष बताई गई है। हालांकि, आरोपियों की पहचान और पते से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि तथा कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार करना जरूरी है।
टाइगर श्रॉफ की कार पर कब हुई थी फायरिंग?
यह घटना 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, टाइगर श्रॉफ फुटबॉल ग्राउंड से कार में लौट रहे थे, तभी हमलावरों ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। घटना में उनके ड्राइवर को चोट लगी, जबकि एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने हमले से पहले टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर रखी थी। शुरुआती रिपोर्टों में उनकी नियमित दिनचर्या की रेकी किए जाने की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के नतीजों से ही होगी।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन की जांच
फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट और संदेश सामने आया था, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स में भी तीनों संदिग्धों के इस गैंग से कथित संबंध होने की बात कही गई है। हालांकि, गैंग की भूमिका और हमले के पीछे के लोगों की पहचान को लेकर जांच जारी है। जिम्मेदारी लेने वाला सोशल मीडिया दावा अपने आप में किसी संगठन की संलिप्तता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
अब पुलिस के सामने क्या हैं बड़े सवाल?
तीनों संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि फायरिंग का आदेश किसने दिया, हमले का मकसद क्या था, आरोपियों ने किस तरह तैयारी की और क्या उनके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या नेटवर्क काम कर रहा था।
फिलहाल, गिरफ्तारी जांच में अहम कदम है, लेकिन हमले की पूरी साजिश और जिम्मेदारी तय होना पुलिस जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।





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