News Desk: नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को हुए 18वें BRICS Summit का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि अलग-अलग रणनीतिक हितों के बावजूद सदस्य देश कई अहम वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख बनाने में सफल रहे। 45 पन्नों के New Delhi Declaration को सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से मंजूर किया। इसमें आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, UN reforms, climate और Global South से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बनी।
लेकिन भारत के नजरिए से इस Summit के 5 फैसले सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहे।
1. Pahalgam Attack पर चीन समेत BRICS का कड़ा रुख
BRICS Declaration में 22 अप्रैल 2025 के Pahalgam आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
घोषणापत्र ने आतंकवाद के खिलाफ “zero tolerance” का रुख दोहराते हुए कहा कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। खास बात यह है कि चीन समेत सभी BRICS सदस्य इस consensus का हिस्सा रहे।
हालांकि Declaration ने पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया। इसलिए इसे भारत की कूटनीतिक उपलब्धि तो माना जा सकता है, लेकिन इसे पाकिस्तान के खिलाफ BRICS की सीधी घोषणा कहना सही नहीं होगा।
2. Terror Funding और Safe Havens के खिलाफ संदेश
BRICS ने सिर्फ आतंकवादी संगठनों की निंदा तक बात सीमित नहीं रखी। Declaration में आतंकवादियों के supporters, safe havens और financing networks के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया।
भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ “double standards” खत्म करने और आतंक की फंडिंग रोकने की मांग करता रहा है। इस लिहाज से BRICS का साझा रुख भारत की counter-terror diplomacy के लिए महत्वपूर्ण है।
3. Trade War और Unilateral Tariffs के खिलाफ BRICS
दूसरा बड़ा मुद्दा global trade रहा। BRICS ने एकतरफा tariffs और trade barriers पर चिंता जताई और multilateral trading system को मजबूत करने की बात कही।
यानी संदेश साफ है—बड़े देशों द्वारा unilateral trade restrictions लगाने से developing economies पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जाए।
BRICS ने WTO में सुधार और ज्यादा inclusive global trade व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया।
4. UN Security Council में सुधार
भारत के लिए यह फैसला भी बेहद महत्वपूर्ण है। BRICS ने global governance institutions में reforms की जरूरत दोहराई।
भारत लंबे समय से UN Security Council में permanent membership की मांग करता रहा है। BRICS के भीतर भारत और ब्राजील की बेहतर representation की मांग को समर्थन मिलना इस दिशा में महत्वपूर्ण diplomatic backing है।
यह सिर्फ भारत का मुद्दा नहीं है, Global South का तर्क है कि आज की दुनिया की आर्थिक और जनसंख्या संबंधी वास्तविकताओं के मुताबिक वैश्विक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व भी बदलना चाहिए।
5. Local Currency और Global South पर जोर
BRICS ने international trade में local currencies और cross-border payment systems के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में सहयोग जारी रखने पर जोर दिया।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है, BRICS ने कोई अलग BRICS currency लॉन्च नहीं की है। फोकस फिलहाल local-currency settlements और financial cooperation बढ़ाने पर है।
इसके साथ ही BRICS ने Global South की development priorities- food security, energy, technology, AI, climate और sustainable development को अपनी agenda के केंद्र में रखा।
भारत के लिए इसका मतलब क्या?
दिल्ली BRICS Summit का महत्व सिर्फ पांच फैसलों तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय हुआ जब दुनिया trade wars, geopolitical conflicts, terrorism, supply-chain disruptions और बदलते global power balance से गुजर रही है।
भारत ने एक तरफ चीन और रूस जैसे strategic partners के साथ संवाद बनाए रखा, वहीं दूसरी तरफ Pahalgam जैसे मुद्दों पर अपने राष्ट्रीय हित को BRICS के साझा मंच पर सामने रखा।
यही इस Summit की सबसे बड़ी कहानी है- BRICS अब केवल economic grouping नहीं, बल्कि Global South की बढ़ती राजनीतिक और कूटनीतिक आवाज का महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है।





Join the discussion
No comments yet — be the first to weigh in.