News Desk: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सपा के साथ सीट बंटवारे की बातचीत की तैयारी के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस गठबंधन में लगभग 125 सीटों पर दावा पेश करने की तैयारी कर रही है, जबकि सपा 60 से 65 सीटों से ज्यादा देने के पक्ष में नहीं बताई जा रही है। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाना है।
प्रियंका गांधी के हाथ में बातचीत की अहम जिम्मेदारी
कांग्रेस की रणनीति में प्रियंका गांधी की भूमिका अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यूपी कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक कर उन विधानसभा सीटों पर चर्चा की, जहां पार्टी अपनी दावेदारी पेश कर सकती है। सीटों को तीन श्रेणियों A, B और C में बांटने की योजना बनाई गई है।
कांग्रेस ने करीब 100 सीटों को A श्रेणी, 40 से 50 सीटों को B श्रेणी और 25 से 35 सीटों को C श्रेणी में रखा है। अगली बैठक के बाद पार्टी सपा के सामने लगभग 125 से 150 सीटों की सूची रख सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, दोनों दल नवंबर तक सीट बंटवारे पर सहमति बनाने का लक्ष्य रख सकते हैं।
कांग्रेस की नजर 125 सीटों पर, सपा का अपना गणित
कांग्रेस की दावेदारी का आधार 2024 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को बताया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों के अंतर्गत कम-से-कम एक विधानसभा सीट पर उसे चुनाव लड़ने का मौका मिले।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और छह सीटें जीती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस 38 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी और 42 अन्य क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही थी। पार्टी इन क्षेत्रों को अपनी संभावित दावेदारी के आधार के तौर पर देख रही है।
दूसरी तरफ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव सीटों के बंटवारे में जीतने की संभावना को प्राथमिकता देने की बात कहते रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, सपा कांग्रेस को लगभग 60 से 65 सीटें देने के पक्ष में बताई जा रही है और खुद करीब 350 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। यदि दोनों दल अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो बातचीत आसान नहीं होगी।
अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर पर भी दावेदारी
कांग्रेस की संभावित सूची में अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर जैसी सीटें भी शामिल बताई जा रही हैं, जहां फिलहाल सपा के विधायक हैं। इसके अलावा पार्टी अपने प्रमुख नेताओं से जुड़ी सीटों पर भी दावा करना चाहती है।
हालांकि, अमेठी और रायबरेली लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की ऐतिहासिक राजनीतिक पहचान रही है, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी इन दोनों क्षेत्रों की कुल 10 विधानसभा सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। ऐसे में कांग्रेस के लिए पुरानी राजनीतिक पहचान को विधानसभा स्तर पर मजबूत प्रदर्शन में बदलना बड़ी चुनौती होगी।
2022 में अकेले लड़ी थी कांग्रेस, जीती थीं सिर्फ दो सीटें
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था और 403 सदस्यीय विधानसभा में उसे सिर्फ दो सीटें मिली थीं। इसके विपरीत, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन ने कांग्रेस को छह लोकसभा सीटें जीतने में मदद की। यही वजह है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन को अपने लिए अहम मान रही है।
कांग्रेस की राज्य इकाई में हालिया बदलावों को भी गठबंधन की तैयारी के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी ने आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। इन बदलावों के जरिए संगठन को मजबूत करने और सपा के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है।
क्या नवंबर तक तय हो जाएगा गठबंधन?
फिलहाल कांग्रेस और सपा दोनों की ओर से गठबंधन की संभावना को लेकर सकारात्मक संकेत बताए जा रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या पर मतभेद बरकरार है। कांग्रेस अधिक सीटों की मांग के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहती है, जबकि सपा अपने संगठन और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर सीटों का बंटवारा करना चाहती है।
अंतिम समझौते के लिए कांग्रेस नेतृत्व और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सहमति निर्णायक होगी। इसलिए आने वाले दिनों में बातचीत का केंद्र यही रहेगा कि कांग्रेस की सीटों की मांग और सपा की जीतने की संभावना पर आधारित रणनीति के बीच कितना तालमेल बन पाता है।
UP Election 2027 में विपक्षी गठबंधन की मजबूती सिर्फ साथ चुनाव लड़ने पर नहीं, बल्कि सीटों के बंटवारे, स्थानीय उम्मीदवारों और दोनों दलों के बीच भरोसे पर भी निर्भर करेगी।





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