News Desk: देशभर में आज 20 अक्टूबर को विजयादशमी का त्योहार मनाया जा रहा है। दिल्ली में इस बार रावण दहन के पारंपरिक आयोजन को सामाजिक मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की गई है। कहीं 221 फीट ऊंचा रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र है, तो कहीं रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इसके अलावा नकली दवाओं, महंगी दवाओं और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों को भी पुतलों के जरिए उठाया जा रहा है।
रावण के साथ क्यों जलाया जाएगा 30 फीट का कॉकरोच?
दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला समिति ने इस बार दशहरे पर 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला तैयार किया है। आयोजकों के मुताबिक, कॉकरोच गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक है। इस पुतले के दहन के जरिए लोगों को घरों, गलियों और आसपास के इलाकों में सफाई रखने का संदेश दिया जाएगा।
यह आयोजन स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियानों से भी जोड़ा गया है। समिति के अध्यक्ष और बीजेपी विधायक अशोक गोयल ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, न कि राजनीतिक संदेश देना।
दिल्ली में 221 फीट ऊंचा रावण भी आकर्षण
द्वारका श्री रामलीला सोसायटी ने इस साल 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया है। आयोजकों ने इसे इस साल भारत का सबसे ऊंचा रावण का पुतला बताया है। इसके साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के 90-90 फीट ऊंचे पुतले भी तैयार किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रावण के पुतले को बनाने में लगभग 38 से 40 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
लव कुश रामलीला में रावण की घूमेगी तलवार
दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित लव कुश रामलीला में इस बार रावण का पुतला करीब 110 फीट ऊंचा है। इसमें विशेष तकनीकी प्रभावों का इस्तेमाल किया गया है। आयोजकों के अनुसार, रावण की तलवार घूमेगी और उसकी आंखें जलती हुई दिखाई देंगी। पुतले पर 11 अलग-अलग रंगों की मालाएं भी लगाई गई हैं।
इस आयोजन में रावण दहन के जरिए अहंकार छोड़ने और अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करने का संदेश देने की योजना है। दिल्ली में वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया जाएगा।
नकली दवाओं और महंगी कीमतों के खिलाफ भी संदेश
पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए ग्राउंड में रामलीला कमेटी इंद्रप्रस्थ ने ‘आज का रावण’ थीम तैयार की है। इसके जरिए नकली दवाओं और दवाओं की कीमतों के नाम पर उपभोक्ताओं के कथित शोषण जैसे मुद्दों को सामने लाया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि रावण के प्रतीक के माध्यम से समाज में मौजूद बुराइयों के खिलाफ जागरूकता पैदा करना इस पहल का उद्देश्य है।
परंपरा के साथ समकालीन मुद्दों पर भी जोर
दिल्ली में इस बार दशहरे के आयोजन केवल रावण दहन तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग रामलीला समितियां पुतलों और विशेष प्रस्तुतियों के जरिए स्वच्छता, प्रदूषण, उपभोक्ता अधिकार और सामाजिक बुराइयों पर ध्यान खींच रही हैं।
रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस साल दिल्ली के आयोजनों में इसी संदेश को रोजमर्रा की समस्याओं से जोड़ने की कोशिश की गई है। हालांकि, आयोजकों के प्रतीकात्मक संदेशों के साथ-साथ इन समस्याओं का वास्तविक समाधान नागरिक भागीदारी और ठोस कदमों पर भी निर्भर करेगा।





1 comment
Rishabh Dixit ·
परंपराएं भूल कर हर साल कुछ नया करते हैं