News Desk: पाकिस्तान पहले से ही वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति प्रभावित होने से देश की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। गैस की कमी के बीच बिजली उत्पादन के लिए कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। इससे लाहौर समेत पंजाब के कई शहरों में सर्दियों से पहले ही जहरीले स्मॉग का खतरा बढ़ने की आशंका है।
LNG की कमी ने पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर बढ़ाया दबाव
आजतक की 20 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध से अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार में आपूर्ति बाधित हुई है। पाकिस्तान अपनी गैस जरूरतों के लिए कतर से होने वाली आपूर्ति पर काफी निर्भर है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने का असर बिजली उत्पादन और अन्य क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता पर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस महंगी होने के कारण भी पाकिस्तान के लिए पर्याप्त LNG खरीदना मुश्किल हो रहा है। सितंबर में रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के कारण मध्य पूर्व से LNG की आपूर्ति में कमी आई और एशियाई बाजार में कीमतें बढ़ गईं। इसकी वजह से पाकिस्तान समेत कई देशों ने गैस की जगह कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ाया।
कोयले और तेल से बिजली बनाने पर क्यों बढ़ता है प्रदूषण?
जब प्राकृतिक गैस की जगह कोयले और फर्नेस ऑयल जैसे ईंधनों का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए बढ़ता है, तो वायु प्रदूषण का जोखिम भी बढ़ सकता है। इन ईंधनों को जलाने से सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक निकलते हैं, जो हवा की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं।
इनमें PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण खास चिंता का विषय हैं। ये सांस के साथ फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, प्रदूषण कितना बढ़ेगा, यह इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन, औद्योगिक उत्सर्जन, मौसम और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर निर्भर करेगा।
लाहौर और पंजाब के शहरों में पहले से प्रदूषण की मार
पाकिस्तान में स्मॉग की समस्या केवल LNG संकट से नहीं जुड़ी है। लाहौर, रावलपिंडी और इस्लामाबाद जैसे शहरों में वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं और सड़कों की धूल भी प्रदूषण बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली जलाने से भी हवा में प्रदूषक कण बढ़ सकते हैं। सर्दियों में मौसम की कुछ परिस्थितियां इन प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक सकती हैं, जिससे स्मॉग लंबे समय तक बना रह सकता है। ऐसे में ऊर्जा संकट प्रदूषण की पहले से मौजूद समस्या को और गंभीर बना सकता है।
क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां पाकिस्तान को राहत दे सकती हैं?
पाकिस्तान ने 2030 तक वाहनों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों से सड़क पर पेट्रोल और डीजल जलने के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसका फायदा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बिजली किस स्रोत से बनाई जा रही है। यदि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चार्ज करने के लिए ज्यादा बिजली कोयले और तेल से बनाई जाती है, तो प्रदूषण का कुछ हिस्सा सड़कों से हटकर बिजली उत्पादन केंद्रों तक पहुंच सकता है। इसलिए इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी जरूरी है।
संकट से निकलने के लिए क्या करना होगा?
पाकिस्तान के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है- ऊर्जा की जरूरत पूरी करना और हवा की गुणवत्ता को बिगड़ने से रोकना। इसके लिए LNG की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना, उद्योगों के उत्सर्जन पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन में सुधार जैसे कदम अहम हो सकते हैं।
निष्कर्ष: अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़ा LNG संकट पाकिस्तान के लिए सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति का मामला नहीं है। गैस की कमी के कारण यदि कोयले और तेल पर निर्भरता बढ़ती है, तो पहले से प्रदूषित शहरों में स्मॉग का खतरा भी बढ़ सकता है। हालांकि, प्रदूषण की गंभीरता कई कारकों पर निर्भर करेगी और इसे केवल LNG संकट का नतीजा मानना सही नहीं होगा।





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