News Desk: भारत और कनाडा के रिश्तों में सुधार की कोशिशों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2026 में कनाडा जाएंगे। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यालय के मुताबिक, यह दौरा 11 और 12 दिसंबर को प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनयिक तनाव रहा है, लेकिन अब व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर इसलिए भी रहेगी, क्योंकि भारत और कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA पर बातचीत को 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसके अलावा, दोनों देश 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं। ऐसे में सवाल है कि मोदी के इस दौरे से भारत को क्या हासिल हो सकता है और क्या दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई कड़वाहट पूरी तरह दूर हो पाएगी?
1. भारत-कनाडा ट्रेड डील: सबसे अहम मुद्दा
मोदी के दौरे के एजेंडे में व्यापार समझौता सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक हो सकता है। भारत और कनाडा ने मार्च 2026 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। दोनों देशों ने वार्ता को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
CEPA का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना, बाजार तक पहुंच बढ़ाना और निवेश के नए अवसर तैयार करना है। समझौते की शर्तें तय होने पर दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों में कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
भारत के लिए कनाडा कृषि उत्पादों, ऊर्जा, खनिजों और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। वहीं, कनाडा को भारतीय बाजार में अपने उत्पादों और सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, समझौते पर बातचीत पूरी होना और उसका लागू होना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए अंतिम नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि दोनों देश बाजार पहुंच, शुल्क और अन्य व्यापारिक शर्तों पर किस तरह सहमति बनाते हैं।
2. 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना सामने रखी है। यह लक्ष्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को विस्तार देने की रणनीति का हिस्सा है।
इस दिशा में CEPA के अलावा कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों के दौरे, निवेश, ऊर्जा आपूर्ति और तकनीकी साझेदारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
कनाडा वैश्विक व्यापार में अपने साझेदारों का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत भी निर्यात, निवेश और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के हित इस मोर्चे पर एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
लेकिन व्यापार लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल राजनीतिक सहमति पर्याप्त नहीं होगी। कंपनियों की भागीदारी, परिवहन लागत, बाजार तक पहुंच और कारोबारी नियम भी अहम भूमिका निभाएंगे।
3. यूरेनियम समझौता: भारत की परमाणु ऊर्जा के लिए क्यों जरूरी?
भारत-कनाडा संबंधों में परमाणु ऊर्जा सहयोग भी महत्वपूर्ण है। मार्च 2026 में कनाडाई कंपनी Cameco और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ था।
यूरेनियम परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों के बीच परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण विकल्प है।
इस समझौते से भारत को दीर्घकालिक ईंधन आपूर्ति का एक और स्रोत मिलता है, जबकि कनाडा को भारतीय बाजार के साथ ऊर्जा कारोबार बढ़ाने का अवसर मिलता है।
इसलिए दिसंबर का दौरा किसी नए यूरेनियम समझौते की घोषणा से अधिक पहले से बनी ऊर्जा साझेदारी को आगे बढ़ाने और सहयोग के दूसरे क्षेत्रों पर बातचीत का अवसर हो सकता है। किसी नई घोषणा की पुष्टि होने पर ही उसे दौरे का घोषित परिणाम माना जाएगा।
4. खालिस्तान का मुद्दा और सुरक्षा संबंधी चिंताएं
भारत और कनाडा के संबंधों में सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर भारत की चिंताएं हैं।
जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को खारिज किया था।
इस विवाद का असर राजनयिक संबंधों और आपसी विश्वास पर पड़ा। बाद में दोनों देशों ने बातचीत के जरिए संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए।
भारत की चिंताओं में कनाडा में भारत-विरोधी गतिविधियां और सुरक्षा संबंधी मामले शामिल रहे हैं। ऐसे में मोदी और कार्नी के बीच सुरक्षा सहयोग, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय और आपसी विश्वास को मजबूत करने पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस दौरे में खालिस्तान मुद्दे पर कोई खास समझौता या निर्णायक घोषणा होगी। इसके लिए दोनों सरकारों की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा।
5. ऊर्जा, LNG और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग
भारत की ऊर्जा मांग बढ़ रही है और वह अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, कनाडा तेल, प्राकृतिक गैस और महत्वपूर्ण खनिजों का एक प्रमुख संभावित आपूर्तिकर्ता है।
दोनों देशों ने ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया है। इसमें तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसके साथ ही लिथियम, ग्रेफाइट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग भी अहम हो सकता है। इन संसाधनों की जरूरत इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक उद्योगों में पड़ती है।
भारत के लिए विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकती है। कनाडा के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में कारोबार और निवेश बढ़ाने का अवसर पैदा हो सकता है।
6. तकनीक और निवेश में क्या संभावनाएं हैं?
भारत और कनाडा के बीच तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, अनुसंधान और निवेश के क्षेत्र में भी सहयोग की गुंजाइश है।
भारत के पास बड़ा तकनीकी प्रतिभा आधार और तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार है। वहीं, कनाडा के पास अनुसंधान संस्थान, तकनीकी कंपनियां और निवेश के अवसर हैं। दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ने से कंपनियों, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को लाभ मिल सकता है।
हालांकि, किसी विशेष तकनीकी समझौते या निवेश घोषणा को तभी निश्चित माना जा सकता है, जब संबंधित पक्ष इसकी आधिकारिक पुष्टि करें।
7. भारतीय छात्रों और प्रवासियों पर क्या असर पड़ेगा?
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है और भारतीय छात्र वहां के शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई करते रहे हैं। इसलिए दोनों देशों के रिश्तों का असर शिक्षा, वीजा, आव्रजन, रोजगार और पारिवारिक संपर्क जैसे विषयों पर भी पड़ सकता है।
अगर द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता आती है, तो इससे छात्रों, पेशेवरों और कारोबारियों के बीच संपर्क बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं। लेकिन इससे वीजा या आव्रजन नियम अपने आप नहीं बदलेंगे। किसी भी बदलाव के लिए संबंधित सरकार की औपचारिक घोषणा जरूरी होगी।
निष्कर्ष: रिश्तों में सुधार की परीक्षा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा दौरा दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। व्यापार समझौते पर प्रगति, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग तथा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बातचीत इस यात्रा के प्रमुख पहलू हो सकते हैं।
भारत और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ाने के साझा लक्ष्य हैं, लेकिन पुराने विवादों के कारण पैदा हुई अविश्वास की स्थिति को दूर करना भी उतना ही जरूरी होगा। इस दौरे की सफलता का आकलन केवल संयुक्त बयानों से नहीं, बल्कि ठोस समझौतों, CEPA वार्ता में प्रगति और दोनों देशों के बीच सहयोग के वास्तविक परिणामों से किया जाएगा।





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