News Desk: माफिया अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद को पैरोल पर प्रयागराज लाए जाने के दौरान उनके पीछे चल रहे वाहनों के काफिले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नवाबगंज टोल प्लाजा पर कथित तौर पर बिना टोल शुल्क दिए बैरियर तोड़कर निकलने के मामले में 28 नामजद वाहनों के चालकों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे का बताया जा रहा है। पुलिस उमर अहमद को लखनऊ से प्रयागराज ला रही थी। पुलिस वाहनों के टोल बूथ नंबर-3 से निकलने के बाद पीछे से करीब 28 निजी वाहन पहुंचे। टोल प्रबंधन की शिकायत के मुताबिक, इन वाहनों ने टोल शुल्क दिए बिना तेज रफ्तार में बैरियर पार करने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान बूम बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया। टोल कर्मचारियों से अभद्रता और धमकी का आरोप नवाबगंज टोल प्लाजा के सहायक प्रबंधक जयप्रकाश यादव की शिकायत के अनुसार, कर्मचारियों ने वाहनों को रोकने की कोशिश की तो उनके साथ गाली-गलौज और अभद्रता की गई। शिकायत में कुछ चालकों पर कर्मचारियों को धमकाने और तेज रफ्तार से वाहन उनकी ओर बढ़ाने का भी आरोप लगाया गया है। कर्मचारियों ने किनारे हटकर अपनी जान बचाई। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। कई गाड़ियों के नंबर अधूरे, कुछ पर नंबर प्लेट नहीं मामले को पेचीदा बनाने वाली बात यह है कि शिकायत के अनुसार काफिले में शामिल कुछ वाहनों के नंबर अधूरे थे, जबकि कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी थी। ऐसे में पुलिस अब टोल प्लाजा के CCTV फुटेज के जरिए वाहनों के मॉडल, रंग और नंबर की पहचान कर रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक, उपलब्ध वाहन नंबरों और फुटेज के आधार पर चालकों की पहचान की जा रही है। उमर को पैरोल क्यों मिली थी? उमर अहमद को उनके छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल मिली थी। अबान की झांसी में सड़क हादसे में मौत हुई थी। उमर और उनके भाई अली को पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज लाया गया था। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिसके चलते पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी थी। अब टोल प्लाजा की घटना में पुलिस की जांच का फोकस दो बिंदुओं पर है—बैरियर किस वाहन से टूटा और घटना के दौरान किन लोगों की वास्तविक भूमिका थी। CCTV फुटेज, टोल कर्मचारियों के बयान और वाहनों के पंजीकरण विवरण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन आरोप अभी जांच के अधीन हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 28 वाहनों में से किन-किन चालकों की भूमिका वास्तव में सामने आती है।




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