News Desk: रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म ‘रामायण’ रिलीज से पहले ही चर्चा में है। इस बार वजह फिल्म का नया गाना ‘मंगल रंग’ है, जिसे एआर रहमान ने कंपोज किया है और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। गाने को लेकर सोशल मीडिया पर दो प्रमुख सवाल उठ रहे हैं—क्या इसकी धुन में कव्वाली और सूफी संगीत का प्रभाव है, और क्या यह संगीत रामायण जैसे धार्मिक महाकाव्य की पृष्ठभूमि के अनुरूप है?
हालांकि, इस बहस में केवल संगीत की शैली ही नहीं, बल्कि रहमान की पुरानी रचनाओं से समानता, धार्मिक-सांस्कृतिक अपेक्षाएं और बड़े बजट की फिल्म से दर्शकों की उम्मीदें भी शामिल हैं। ‘इंडिया टुडे’ की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, गाने को लेकर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ लोग इसकी संगीत शैली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दूसरे इसे रचनात्मक स्वतंत्रता के नजरिए से देख रहे हैं।
‘मंगल रंग’ में क्या है खास?
‘मंगल रंग’ भगवान राम और माता सीता के मिलन और विवाह उत्सव को दर्शाता है। गाने में राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर और सीता की भूमिका में साई पल्लवी दिखाई देते हैं। इसके बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं, जबकि संगीत की जिम्मेदारी एआर रहमान ने संभाली है।
गाने का वीडियो स्वयंवर से लेकर विवाह तक की झलक दिखाता है। फिल्म के निर्माताओं ने इसे राम और सीता के रिश्ते तथा उनके पवित्र मिलन के उत्सव के रूप में पेश किया है। लेकिन रिलीज होते ही इसकी संगीत शैली पर चर्चा शुरू हो गई।
कव्वाली से तुलना क्यों हो रही है?
सोशल मीडिया पर कुछ श्रोताओं ने गाने के कोरस, बार-बार दोहराए जाने वाले ‘रंग’ शब्द और संगीत की बनावट की तुलना कव्वाली से की है। कुछ लोगों को इसकी धुन में रहमान के पुराने गाने ‘कुन फाया कुन’ और तमिल फिल्म ‘कंडुकोंडेन कंडुकोंडेन’ के गीत ‘एन्ना सोला पोगिराई’ की झलक भी महसूस हुई।
आलोचकों का तर्क है कि रामायण पर आधारित फिल्म के संगीत में भारतीय शास्त्रीय परंपराओं, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और कहानी के सांस्कृतिक परिवेश को अधिक प्रमुखता मिलनी चाहिए थी। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने वीणा, सितार, मृदंग और संस्कृत शब्दों के इस्तेमाल की भी वकालत की है।
हालांकि, ये श्रोताओं की व्यक्तिगत प्रतिक्रियाएं और संगीत संबंधी व्याख्याएं हैं। केवल कोरस, दोहराव या किसी खास धुन से मिलती-जुलती अनुभूति के आधार पर किसी गीत को पारंपरिक कव्वाली घोषित नहीं किया जा सकता।
क्या एआर रहमान अपने पुराने संगीत को दोहरा रहे हैं?
बहस का दूसरा पहलू रहमान की संगीत शैली से जुड़ा है। कुछ श्रोताओं को ‘मंगल रंग’ सुनकर उनकी पुरानी रचनाओं की याद आई है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या किसी संगीतकार की विशिष्ट पहचान उसकी रचनाओं में निरंतरता दिखाती है या कभी-कभी वही शैली दोहराव जैसी लगने लगती है।
यह बहस केवल ‘मंगल रंग’ तक सीमित नहीं है। फिल्म संगीत में अक्सर संगीतकारों की पुरानी हिट रचनाओं से नई धुनों की तुलना की जाती है। लेकिन किसी गीत का पहले के संगीत से मिलता-जुलता महसूस होना अपने आप में नकल या मौलिकता की कमी का प्रमाण नहीं है। इसके लिए धुन, संरचना और संगीत संयोजन का विस्तृत विश्लेषण जरूरी होगा।
फिलहाल, रहमान के समर्थकों और आलोचकों के बीच इस सवाल पर कोई एकमत नजरिया नहीं है।
क्या रामायण के संगीत से अलग तरह की उम्मीदें हैं?
रामायण करोड़ों लोगों की आस्था और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ी हुई है। इसलिए इस पर आधारित फिल्म से दर्शकों की अपेक्षाएं सामान्य मनोरंजक फिल्मों से अलग हो सकती हैं। कुछ दर्शक चाहते हैं कि संगीत, वाद्ययंत्र, बोल और दृश्य उस धार्मिक-सांस्कृतिक वातावरण को प्रतिबिंबित करें, जिसकी वे महाकाव्य से अपेक्षा करते हैं।
दूसरी ओर, फिल्म संगीत में रचनात्मक प्रयोग भी लंबे समय से होते आए हैं। अलग-अलग संगीत परंपराओं से प्रेरणा लेना अपने आप में किसी रचना को अनुचित नहीं बनाता। असल सवाल यह है कि प्रयोग कहानी के भाव, पात्रों और फिल्म के परिवेश के साथ किस तरह मेल खाता है।
इसलिए ‘मंगल रंग’ पर बहस को केवल पसंद या नापसंद तक सीमित रखने के बजाय संगीत की बनावट, गीत के बोल और दृश्य के संदर्भ में भी समझना जरूरी है।
रिलीज से पहले ही ‘रामायण’ पर बढ़ी निगरानी
फिल्म की कास्टिंग, वेशभूषा, विजुअल इफेक्ट्स और संगीत को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में दोनों हिस्सों की फिल्म परियोजना से जुड़े निवेश का अनुमान लगभग 4,000 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें रिलीज और प्रचार से संबंधित खर्च भी शामिल हैं। इतनी बड़ी परियोजना और रामायण जैसे विषय के कारण दर्शकों की अपेक्षाएं भी काफी ऊंची हैं।
हालांकि, फिल्म के कुछ गानों या दृश्यों के आधार पर पूरी फिल्म के बारे में अंतिम राय बनाना जल्दबाजी हो सकती है। फिल्म देखने के बाद ही यह बेहतर ढंग से आंका जा सकेगा कि संगीत, कहानी और दृश्य एक-दूसरे के साथ कितने प्रभावी ढंग से जुड़ते हैं।
कब रिलीज होगी फिल्म?
नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में हैं। फिल्म में यश, सनी देओल और अन्य कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दुनियाभर में रिलीज होने वाला है।
निष्कर्ष: ‘मंगल रंग’ को लेकर जारी बहस संगीत की शैली, मौलिकता और धार्मिक महाकाव्य के सिनेमाई चित्रण से जुड़ी अपेक्षाओं को सामने लाती है। कुछ श्रोताओं को इसमें कव्वाली जैसी ध्वनि सुनाई देती है, जबकि दूसरे इसे अलग-अलग संगीत प्रभावों के रचनात्मक मेल के रूप में देखते हैं। अंतिम मूल्यांकन के लिए गीत को उसके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी होगा।





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