News Desk: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA ब्लॉक की रैली के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने विपक्ष की इस रैली को ‘फ्लॉप शो’ करार देते हुए दावा किया कि कांग्रेस के 10 लाख लोगों को जुटाने के लक्ष्य के बावजूद मैदान का बड़ा हिस्सा खाली रहा। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके भाषण के दौरान भी हजारों कुर्सियां खाली थीं।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस रैली के जरिए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। रैली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए।
भाजपा का दावा- 40 फीसदी मैदान खाली था
रैली समाप्त होने के बाद भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के भीड़ जुटाने के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने की बात कही थी, लेकिन रामलीला मैदान में उतनी भीड़ नजर नहीं आई।
पात्रा के मुताबिक, मैदान में करीब 28 हजार कुर्सियां लगाई गई थीं। इनमें से 3:30 से 4 बजे के बीच लगभग 5 हजार से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं। उन्होंने दावा किया कि मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली पड़ा था।
भाजपा ने रैली के दौरान के वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए भीड़ के आकार पर सवाल उठाए। पात्रा ने इसे विपक्ष के बड़े दावों और वास्तविक उपस्थिति के बीच अंतर बताते हुए ‘सुपर फ्लॉप’ रैली कहा।
‘ट्रिक फोटोग्राफी से प्रधानमंत्री नहीं बनते’
संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कैमरे के एंगल और तस्वीरों के जरिए भीड़ को बड़ा दिखाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे ‘ट्रिक फोटोग्राफी’ बताया।
पात्रा ने तंज कसते हुए कहा कि इस तरह के हथकंडों से कोई नेता या प्रधानमंत्री नहीं बनता। उन्होंने प्रधानमंत्री शब्द की अपनी व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें ‘P’ का मतलब पसीना और ‘M’ का मतलब मेहनत है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री बनने के लिए मेहनत और जनता के बीच काम करना जरूरी है।
भाजपा नेता ने सवाल किया कि जब कांग्रेस ने 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था, तो वे लोग रैली में कहां थे।
राहुल गांधी के 2024 चुनाव वाले बयान पर भी पलटवार
भाजपा ने केवल भीड़ के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि राहुल गांधी के रैली में दिए गए भाषण पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
इस पर संबित पात्रा ने कहा कि अगर राहुल गांधी को 2024 का चुनाव अवैध लगता था, तो उन्हें चुनाव के तुरंत बाद अदालत में चुनौती देनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल किया कि इस संबंध में याचिका क्यों दाखिल नहीं की गई।
पात्रा ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार 2024 के लोकसभा चुनाव के समय मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे और उन्होंने 2025 में यह पद संभाला था। भाजपा नेता ने तर्क दिया कि यदि चुनाव को अवैध बताया जा रहा है, तो राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष होने और उनके सांसदों के निर्वाचन पर भी सवाल खड़े होंगे।
ये भाजपा की ओर से पेश की गई राजनीतिक दलीलें हैं। चुनाव की वैधता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अंतिम कानूनी निष्कर्ष सक्षम न्यायिक प्रक्रिया से ही तय हो सकता है।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने कथित ‘वोट चोरी’ को लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण देश के लोगों की आवाज प्रभावित हो रही है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई होगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक हमला बोला।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में किसानों, युवाओं और मजदूरों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में केंद्रित हो रही है।
रैली में शामिल हुए INDIA ब्लॉक के कई बड़े नेता
इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी के अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के नेता फारूक अब्दुल्ला और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।
रैली से पहले विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मार्च भी निकाला। इसका मुख्य उद्देश्य SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
भीड़ के आंकड़ों पर सियासी बहस
रामलीला मैदान की रैली को लेकर अब राजनीतिक बहस दो हिस्सों में बंट गई है। भाजपा जहां खाली कुर्सियों और कथित कम उपस्थिति के आधार पर कांग्रेस के दावों पर सवाल उठा रही है, वहीं विपक्ष ने रैली के जरिए चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में रखने की कोशिश की।
फिलहाल, भाजपा की ओर से 40 प्रतिशत मैदान खाली रहने और 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली होने का दावा किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में रैली में शामिल लोगों की कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित कुल संख्या सामने नहीं आई है।
ऐसे में रामलीला मैदान की रैली का राजनीतिक असर केवल भीड़ के आंकड़ों से नहीं, बल्कि SIR, चुनाव आयोग और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर आगे होने वाली राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई से भी तय होगा।





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