News Desk: नई दिल्ली में हुए BRICS Summit 2026 से बांग्लादेश की दूरी ने भारत-बांग्लादेश रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने BRICS Summit में हिस्सा नहीं लिया। लेकिन अब तस्वीर में एक नया मोड़ आया है। ढाका ने संकेत दिया है कि भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए उसके दरवाजे बंद नहीं हैं।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश के बीच संभावित द्विपक्षीय बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हो सकती है। तारिक रहमान 21 सितंबर को न्यूयॉर्क जाने वाले हैं।
BRICS में क्यों नहीं आया बांग्लादेश?
बांग्लादेश BRICS का सदस्य नहीं है, लेकिन उसे Summit से जुड़े outreach format में आमंत्रित किया जा सकता था। हालांकि, इस बार बांग्लादेश ने दिल्ली में हुए Summit से दूरी बनाए रखी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव रहा है। भारत में शेख हसीना की मौजूदगी, सीमा सुरक्षा, व्यापार और राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील सवाल बने हुए हैं।
बांग्लादेश की तरफ से BRICS में शामिल न होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और कूटनीतिक कारण सामने आए, लेकिन इससे यह संदेश जरूर गया कि ढाका अपनी विदेश नीति में भारत से कुछ दूरी बनाए रखना चाहता है।
फिर भारत से बातचीत क्यों?
यहीं इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
भारत और बांग्लादेश सिर्फ पड़ोसी देश नहीं हैं। दोनों के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, नदी जल, सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े रणनीतिक हित जुड़े हैं।
इसीलिए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के लिए संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
भारत ने भी तारिक रहमान को दो अलग-अलग निमंत्रण दिए थे, एक द्विपक्षीय यात्रा के लिए और दूसरा BRICS Summit के Outreach कार्यक्रम के लिए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि bilateral invitation अभी भी कायम है।
यानी BRICS में मौजूदगी और भारत के साथ bilateral relations को भारत ने अलग-अलग ट्रैक पर रखा।
UN में मुलाकात क्यों अहम होगी?
अगर न्यूयॉर्क में मोदी और तारिक रहमान की मुलाकात होती है, तो यह 2024 के राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण diplomatic signal हो सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि दोनों देशों के सभी विवाद खत्म हो गए।
सीमा पर तनाव, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, पानी के बंटवारे और व्यापार जैसे विषय अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
इसलिए संभावित बैठक का असली महत्व इस बात में होगा कि क्या दोनों देश इन मुद्दों पर बातचीत का कोई नया framework तैयार कर पाते हैं।
चीन का factor भी महत्वपूर्ण
भारत-बांग्लादेश रिश्तों को सिर्फ दोनों देशों के बीच का मामला मानना भी पूरी तस्वीर नहीं है।
बांग्लादेश की चीन के साथ भी आर्थिक और रणनीतिक भागीदारी है। दूसरी तरफ भारत हिंद महासागर क्षेत्र और अपने पूर्वोत्तर की सुरक्षा के लिहाज से बांग्लादेश को बेहद महत्वपूर्ण मानता है।
ऐसे में ढाका के लिए भारत और चीन के बीच संतुलन बनाना उसकी विदेश नीति की बड़ी चुनौती है।
BRICS Summit में चीन की मौजूदगी और भारत-चीन के बीच बातचीत के समानांतर बांग्लादेश का भारत से bilateral engagement की ओर लौटना क्षेत्रीय geopolitics के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
क्या रिश्ते फिर पटरी पर लौटेंगे?
फिलहाल इसे पूर्ण diplomatic reset कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन संकेत जरूर सकारात्मक हैं।
BRICS से दूरी के बाद भी बांग्लादेश भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है और भारत भी bilateral engagement का रास्ता खुला रखे हुए है।
अगर UN General Assembly के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होती है, तो यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं होगी। यह इस बात का संकेत हो सकती है कि भारत और बांग्लादेश अपने मतभेदों के बावजूद संवाद को पूरी तरह टूटने नहीं देना चाहते।
आने वाले महीनों में असली परीक्षा यही होगी, क्या दोनों देश राजनीतिक तनाव को पीछे छोड़कर व्यापार, सीमा, पानी और सुरक्षा जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर फिर से सहयोग बढ़ा पाएंगे?





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