News Desk: पंजाब की राजनीति में एक पुराना राजनीतिक समीकरण फिर से आकार लेता दिखाई दे रहा है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और BJP, जो कभी पंजाब की राजनीति की सबसे मजबूत जोड़ियों में गिने जाते थे, क्या 2027 विधानसभा चुनाव से पहले फिर साथ आने वाले हैं? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की शुक्रवार को हुई मुलाकात के ठीक अगले दिन अकाली दल का केंद्र सरकार के दो अहम प्रस्तावों—महिला आरक्षण और परिसीमन—पर समर्थन देना इस सवाल को और बड़ा बना रहा है। हालांकि दोनों दलों ने अभी औपचारिक गठबंधन का ऐलान नहीं किया है।
एक मुलाकात और बदली राजनीतिक हवा
सुखबीर बादल ने शनिवार को चंडीगढ़ में पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद कहा कि SAD देश में महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के पक्ष में है। साथ ही पार्टी ने केंद्र के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में 50% की समान वृद्धि की बात कही गई है। बादल ने इसे सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व देने वाली निष्पक्ष परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा।
लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि अप्रैल 2026 में SAD इसी परिसीमन प्रस्ताव के खिलाफ खड़ा था। उस समय पार्टी ने इसे पंजाब के लिए भेदभावपूर्ण बताते हुए विपक्ष के साथ बिल का विरोध किया था। अब उसी प्रस्ताव को समर्थन मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे BJP-SAD रिश्तों में संभावित नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पुराना रिश्ता क्यों टूटा था?
BJP और SAD का गठबंधन करीब ढाई दशक तक पंजाब की राजनीति में प्रभावशाली रहा। दोनों दलों ने अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक आधारों को जोड़कर चुनावी ताकत बनाई थी। लेकिन 2020 में कृषि कानूनों को लेकर मतभेद इतना बढ़ा कि अकाली दल ने NDA से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद दोनों पार्टियां 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ीं।
और नतीजे बताते हैं कि दोनों के लिए यह अलगाव आसान नहीं रहा।
2022 विधानसभा चुनाव में:
- AAP - 92 सीटें, 42.01% वोट
- Congress - 18 सीटें, 22.98% वोट
- SAD - 3 सीटें, 18.38% वोट
- BJP - 2 सीटें, 6.60% वोट
2024 लोकसभा चुनाव में तस्वीर और दिलचस्प रही। पंजाब की 13 सीटों में कांग्रेस ने 7, AAP ने 3 और SAD ने सिर्फ 1 सीट जीती। BJP एक भी सीट नहीं जीत सकी, हालांकि उसका वोट शेयर करीब 18.56% रहा—जबकि SAD का करीब 13.42% था।
2027 में गठबंधन क्यों महत्वपूर्ण है?
पंजाब की राजनीति अब पहले जैसी दोध्रुवीय नहीं रही। AAP सत्ता में है, कांग्रेस मुख्य चुनौती बनी हुई है, जबकि SAD अपना पुराना आधार वापस पाने की कोशिश कर रहा है और BJP राज्य में अकेले अपना विस्तार कर रही है।
यही वजह है कि दोनों के वोट अलग-अलग रहने पर मुकाबला और ज्यादा बहुकोणीय हो सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक, SAD के ग्रामीण-सिख आधार और BJP के शहरी वोट बैंक का पुराना समीकरण फिर सक्रिय हुआ तो 2027 का मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है—क्या यह सिर्फ संसद में मुद्दों पर रणनीतिक समर्थन है या फिर 2027 के लिए BJP-SAD गठबंधन की वापसी की पहली सीढ़ी?
फिलहाल इतना जरूर है कि जिस गठबंधन का अध्याय 2020 में किसान आंदोलन के बीच बंद हुआ था, उसके पन्ने 2026 में फिर खुलते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन सीट शेयरिंग, नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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