News Desk: भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में एक बदलाव ने सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा पैदा की है, करीब 11 साल तक BJP के IT और Social Media Department की कमान संभालने वाले अमित मालवीय अब इस जिम्मेदारी में नहीं हैं। उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को नया प्रमुख बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब सोशल मीडिया भारतीय राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मैदान बन चुका है।
सवाल इसलिए बड़ा है- क्या यह सिर्फ संगठनात्मक रोटेशन है या BJP अपनी डिजिटल रणनीति का पूरा मॉडल बदलने जा रही है?
2015 से एक ही चेहरा, अब बदलाव क्यों?
अमित मालवीय ने 2015 से BJP के IT और सोशल मीडिया विभाग का नेतृत्व किया। यानी करीब 11 साल तक पार्टी के डिजिटल नैरेटिव, सोशल मीडिया कैंपेन और ऑनलाइन राजनीतिक संवाद के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे। इसके साथ ही वह पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
लेकिन BJP सूत्रों के मुताबिक, उनकी विदाई को केवल हाल के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ना सही नहीं होगा। सूत्रों का दावा है कि मालवीय ने 2019 और 2024 लोकसभा चुनावों के बाद खुद भी IT Cell की जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा जताई थी। यहां तक कि नए प्रमुख के लिए संभावित नामों पर पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी चर्चा भी हुई थी।
यानी आधिकारिक तौर पर यह किसी अचानक हुई कार्रवाई से ज्यादा लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा दिखाई देता है।
लेकिन ‘Gen Z’ एंगल क्यों चर्चा में है?
BJP के इस फैसले को कुछ राजनीतिक विश्लेषक हालिया Gen Z आंदोलन और डिजिटल राजनीति में बदलते समीकरणों से जोड़ रहे हैं।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर BJP की मजबूत पकड़ के बावजूद विपक्षी दलों ने भी Instagram, YouTube और दूसरे platforms पर अपनी डिजिटल मौजूदगी काफी बढ़ाई है।
NDTV की रिपोर्ट में भी BJP के भीतर इस बात पर चर्चा का उल्लेख है कि पार्टी को डिजिटल स्पेस में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि BJP के सूत्रों ने मालवीय को हटाने की वजह केवल इन घटनाओं को मानने से इनकार किया है। इसलिए इसे कारण नहीं बल्कि बदलते डिजिटल माहौल का संकेत समझना ज्यादा उचित होगा।
अब कमान किसके हाथ में?
अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को BJP का नया IT/Social Media प्रमुख बनाया गया है। म्हस्के की प्रोफाइल मालवीय से काफी अलग है। वह मूल रूप से Chemistry के प्रोफेसर रहे हैं और चुनावी डेटा विश्लेषण तथा सार्वजनिक प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं। BJP से उनका संबंध 2009 से बताया जाता है। और यह बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पार्टी ने डिजिटल टीम में चार नए को-कन्वीनर भी नियुक्त किए हैं प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव।
इससे संकेत मिलता है कि BJP डिजिटल संगठन को एक व्यक्ति-केंद्रित मॉडल से ज्यादा व्यापक टीम और डेटा-आधारित ढांचे की ओर ले जाना चाहती है।
आंकड़ों में BJP की डिजिटल ताकत
भारत में इंटरनेट और सोशल मीडिया की पहुंच अब चुनावी राजनीति को सीधे प्रभावित करती है। DataReportal के मुताबिक, 2025 की शुरुआत तक भारत में करीब 806 million internet users और लगभग 491 million social media user identities थीं। यानी जिस देश में करोड़ों मतदाता रोजाना सोशल मीडिया पर news, videos और political content consume कर रहे हों, वहां IT Cell महज publicity department नहीं रह जाता। यह चुनावी war room जैसा काम करता है।
मालवीय की विरासत क्या रही?
2014 के बाद BJP की डिजिटल रणनीति भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मॉडल बनकर उभरी। मालवीय के कार्यकाल में पार्टी ने social media पर तेज प्रतिक्रिया, नेताओं के संदेशों का amplification और coordinated digital campaigns को लगातार मजबूत किया।
लेकिन इस मॉडल के साथ विवाद भी जुड़े रहे। उनके कार्यकाल में BJP IT Cell पर misinformation और aggressive online campaigning को लेकर विपक्ष तथा fact-checking organisations ने कई आरोप लगाए। इन आरोपों पर BJP और मालवीय ने कई बार अलग-अलग दावों का खंडन भी किया है। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य की तरह नहीं, बल्कि राजनीतिक विवाद के हिस्से के रूप में देखना चाहिए।
अब असली टेस्ट दीपक म्हस्के का
अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के की नियुक्ति को BJP के डिजिटल communication में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ 11 साल का अनुभव खत्म हुआ है, दूसरी तरफ डेटा और अकादमिक पृष्ठभूमि वाला नया चेहरा आया है। आने वाले विधानसभा चुनाव और फिर 2029 लोकसभा चुनाव इस नई डिजिटल टीम की पहली बड़ी परीक्षा होंगे।
क्योंकि अब चुनाव सिर्फ बूथ और मैदान में नहीं लड़े जाते। लड़ाई मोबाइल स्क्रीन पर भी है, जहां एक वीडियो कुछ घंटों में करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए अमित मालवीय की विदाई का असली सवाल यह नहीं है कि “उन्हें क्यों हटाया गया?”
बल्कि बड़ा सवाल है- क्या BJP अब अपनी डिजिटल राजनीति का अगला अध्याय लिखने जा रही है?




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