News Desk: भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम का ऐलान किया और इस सूची में एक नाम ने सबसे ज्यादा राजनीतिक ध्यान खींचा- राम माधव। RSS के पुराने प्रचारक और BJP के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को अब पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। खास बात यह है कि वह करीब 6 साल बाद BJP के केंद्रीय संगठन में वापस लौटे हैं। यह महज एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं मानी जा रही। इसकी वजह है राम माधव की पृष्ठभूमि और BJP-RSS के बीच उनका पुराना ‘पुल’ वाला रोल। राम माधव की राजनीति में खासियत क्या है? राम माधव ने लंबे समय तक RSS में काम किया। वह संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सह-प्रचार प्रमुख जैसे पदों पर रहे। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP की सत्ता में वापसी के बाद RSS ने उन्हें BJP संगठन में भेजा, जहां उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। 2014 से 2020 तक BJP में रहते हुए उनका सबसे बड़ा प्रभाव पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में दिखाई दिया। असम, त्रिपुरा और नागालैंड में BJP के संगठन विस्तार में उनकी भूमिका रही, जबकि जम्मू-कश्मीर में वह BJP-PDP गठबंधन सरकार के गठन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल थे। यानी राम माधव सिर्फ दिल्ली के संगठनात्मक नेता नहीं थे, वह गठबंधन, क्षेत्रीय राजनीति और RSS-BJP coordination के लिए जाने जाते रहे हैं। फिर 2020 में क्या हुआ? सितंबर 2020 में BJP की नई राष्ट्रीय टीम घोषित हुई और राम माधव को महासचिव पद से हटा दिया गया। इसके बाद वह दोबारा RSS के सक्रिय काम में लौटे और RSS की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हिस्सा बने। अब लगभग छह साल बाद उनकी BJP में वापसी हो रही है। यानी 2020 से 2026 छह साल का अंतर। और इसी अंतर को समझना इस पूरी कहानी की सबसे अहम कड़ी है। क्या यह RSS-BJP रिश्तों का संदेश है? NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, राम माधव की नई नियुक्ति को BJP और RSS के बीच समन्वय के नजरिए से भी देखा जा रहा है। BJP के नए संगठन में RSS से जुड़े कई नेताओं की मौजूदगी बरकरार रखी गई है। बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बने हुए हैं, जबकि RSS पृष्ठभूमि वाले शिव प्रकाश और सौदान सिंह संगठन के संयुक्त महासचिव के रूप में जारी हैं। वहीं सुनील बंसल, जिन्हें RSS से BJP में लाया गया था, राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं। इसलिए एक संदेश स्पष्ट है- BJP का संगठन RSS से जुड़े अनुभवी चेहरों को किनारे नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें नई जिम्मेदारियों के साथ बनाए रख रहा है।
इसमें PM मोदी की भूमिका? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राम माधव की नई जिम्मेदारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। 2014 में RSS से BJP में भेजे जाने के समय भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी। हालांकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद अपने आप में रोजाना के संगठन संचालन का सबसे शक्तिशाली पद नहीं है। लेकिन राम माधव का राजनीतिक अनुभव देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि उन्हें आगे और महत्वपूर्ण संगठनात्मक या चुनावी जिम्मेदारी दी जा सकती है। सिर्फ राम माधव नहीं Smriti Irani की वापसी भी बड़ी कहानी BJP की नई टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। इसके साथ ही वसुंधरा राजे, बैजयंत पांडा और कई अन्य अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। नई टीम में 10 महिला और 6 अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े नेता भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि BJP एक साथ अनुभव, संगठन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और चुनावी रणनीति को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। 2029 की तैयारी या उससे भी बड़ी रणनीति? BJP की नई टीम ऐसे समय सामने आई है जब पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2029 लोकसभा चुनाव की लंबी रणनीति तैयार करनी है। राम माधव जैसे नेता की वापसी इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि उनके पास RSS का संगठनात्मक अनुभव + BJP की सत्ता राजनीति + गठबंधन प्रबंधन + जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर का अनुभव + अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ- इन सभी का मिश्रण है। वह India Foundation जैसे मंचों से अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भी सक्रिय रहे हैं। इसलिए राम माधव की वापसी को सिर्फ “एक पुराने नेता की वापसी” कहना शायद अधूरा होगा। 2014 में RSS से BJP में भेजे गए राम माधव 2020 में वापस RSS में गए थे… और अब 2026 में फिर BJP के केंद्रीय संगठन में लौट आए हैं। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश शायद यही है- BJP 3.0 में पुराने संगठनात्मक अनुभव को नए राजनीतिक समीकरणों के साथ फिर से जोड़ा जा रहा है। और अगर राम माधव को आने वाले महीनों में कोई बड़ी चुनावी या संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलती है, तो आज की यह नियुक्ति BJP की अगली बड़ी रणनीति का सिर्फ पहला संकेत साबित हो सकती है।




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