News Desk: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के करीब दो हफ्ते बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार खुलकर बताया कि आखिर उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया। भुवनेश्वर की GM University में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि Gen Z उनका अपना बच्चा है और कुछ लोगों ने इस पीढ़ी को “mislead” करने की कोशिश की। उन्होंने साफ किया कि उनके लिए मंत्री पद व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं था।
लेकिन इस एक बयान के पीछे भारत के शिक्षा तंत्र का एक बड़ा संकट छिपा है-NEET-UG 2026 पेपर लीक, लाखों छात्रों का भविष्य, NTA पर उठे सवाल और सड़कों पर उतरी Gen Z।
3 मई का NEET, 12 मई को रद्द
NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। इसके बाद प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए। केंद्र ने मामले की जांच CBI को सौंपी और 12 मई को NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी। दोबारा परीक्षा कराने का फैसला हुआ और सरकार ने अगले साल से NEET को Computer-Based Test यानी CBT मोड में कराने की घोषणा की।
इसका मतलब था कि 20 लाख से अधिक मेडिकल aspirants को दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता से गुजरना पड़ा। यह सिर्फ एक परीक्षा का संकट नहीं था- एक साल की तैयारी, लाखों परिवारों का खर्च और मेडिकल सीट हासिल करने की उम्मीद सीधे प्रभावित हुई।
और आंकड़ा बताता है कि समस्या कितनी बड़ी थी। 2026 में NTA की चार बड़ी परीक्षाओं NEET-UG, JEE Main, CUET और अन्य प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में अनुमानित 55 लाख उम्मीदवार शामिल हुए। यानी परीक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक का असर लाखों युवाओं तक पहुंच सकता है।
सड़क पर आया गुस्सा
NEET विवाद धीरे-धीरे एक व्यापक छात्र आंदोलन में बदल गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ और Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने प्रधान के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बनाया। विपक्षी दलों ने भी संसद में छात्रों के मुद्दे को उठाया।
आंदोलन का असर इतना बढ़ा कि 25 जुलाई को प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति ने उसी दिन इस्तीफा स्वीकार कर लिया और प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
प्रधान ने अब क्या कहा?
अब अपने इस्तीफे के पीछे की सोच बताते हुए प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल करीब 2 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। उनके मुताबिक पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं और इस पूरी युवा पीढ़ी की अपनी आकांक्षाएं हैं।
उन्होंने कहा कि वे इन युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित थे और उन्हें लगा कि कुछ लोग Gen Z को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि मंत्री पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं था।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क है - प्रधान ने अपने बयान में यह नहीं कहा कि इस्तीफा सिर्फ पेपर लीक की प्रशासनिक जिम्मेदारी के कारण दिया गया। उनके सार्वजनिक बयानों में छात्रों की भावनाएं, आंदोलन, राष्ट्रीय एकता और आंदोलन को लेकर उनकी चिंताएं भी शामिल थीं। उनके मूल इस्तीफे में भी उन्होंने छात्रों के भविष्य और आंदोलन के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई थी।
NEET से बड़ा सवाल: भरोसा कैसे लौटेगा?
प्रधान का इस्तीफा राजनीतिक तौर पर एक बड़ा घटनाक्रम है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है।
सिर्फ मंत्री बदलने से परीक्षा व्यवस्था का भरोसा वापस नहीं आएगा।
जरूरत है- पेपर सेटिंग और printing की multi-layer security, digital tracking, मजबूत whistleblower mechanism, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और leak होने की स्थिति में तुरंत जवाबदेही तय करने की।
क्योंकि एक competitive exam में छात्र सिर्फ प्रश्नों का जवाब नहीं देता- वह अपने परिवार के वर्षों के सपने का जवाब देता है।
और NEET-UG 2026 ने यही दिखाया है कि आज की Gen Z सिर्फ नौकरी और डिग्री नहीं चाहती।
वह एक ऐसी व्यवस्था चाहती है जिसमें मेहनत का मूल्य हो, परीक्षा निष्पक्ष हो और सिस्टम पर भरोसा किया जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ दिया है।
अब असली सवाल यह है- क्या भारत की परीक्षा व्यवस्था भी उस पुराने सिस्टम को छोड़कर नए भरोसे की शुरुआत करेगी?




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