News Desk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में अब सिर्फ मिसाइलों की संख्या नहीं, बल्कि उन्हें इस्तेमाल करने का तरीका भी निर्णायक बनता जा रहा है। अमेरिकी एयर डिफेंस को चुनौती देने के लिए ईरान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान अब ड्रोन और अलग-अलग तरह की मिसाइलों को एक साथ इस्तेमाल कर अमेरिकी रक्षा प्रणालियों पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इस रणनीति पर यूक्रेन युद्ध में रूस द्वारा अपनाए गए मिश्रित हमलों का प्रभाव भी दिखाई देता है।
यूक्रेन से सीखा ‘Mixed Attack’ का सबक
यूक्रेन युद्ध में रूस ने कई मौकों पर ड्रोन के साथ ballistic और cruise missiles का इस्तेमाल किया। मकसद था कि सामने मौजूद air-defence network को एक साथ कई तरह के खतरों से निपटना पड़े।
अब ईरान भी इसी व्यापक अवधारणा को अपना रहा है। NDTV के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान ने लगातार पांच दिनों तक ड्रोन और मिसाइलों की waves भेजीं। इसका एक अहम उद्देश्य अमेरिकी air-defence systems को लगातार सक्रिय रखना और महंगे Patriot interceptors का इस्तेमाल करवाना था।
यानी रणनीति सिर्फ यह नहीं है कि “कितनी मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचीं”, बल्कि यह भी है कि हमले को रोकने में सामने वाले को कितने संसाधन खर्च करने पड़े।
17 जुलाई का हमला क्यों बना Turning Point?
शुरुआती चार दिनों में अमेरिकी air defences ने अधिकांश incoming weapons को रोक लिया। लेकिन 17 जुलाई को एक ईरानी मिसाइल अमेरिकी ठिकाने की सुरक्षा परत को पार कर गई और अस्थायी आवासीय क्षेत्र से टकराई।
इस हमले में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई और 100 से अधिक लोग घायल हुए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बाद में कहा कि लगभग सभी मिसाइलें रोक दी गईं, लेकिन “एक” रक्षा प्रणाली से निकल गई।
यही घटना दिखाती है कि अत्याधुनिक air defence के सामने भी 100% interception की गारंटी नहीं होती।
Patriot की असली चुनौती: Missile vs Missile नहीं, Economics भी
यहां सबसे दिलचस्प आंकड़ा सामने आता है।
Reuters के मुताबिक, एक Patriot PAC-3 interceptor की अनुमानित कीमत लगभग $4–5 million है। एक नई Patriot battery की कुल लागत missiles सहित $1 billion से ज्यादा हो सकती है।
Reuters ने CSIS के अनुमान का हवाला देते हुए बताया कि फरवरी से जुलाई 2026 के बीच अमेरिका के लगभग 65% Patriot interceptors इस्तेमाल हो चुके थे, जबकि शुरुआती inventory करीब 2,330 थी और 850 से कम interceptor शेष रहने का अनुमान लगाया गया।
इसका मतलब है कि युद्ध अब एक अलग तरह की गणित भी बन चुका है- सस्ता या अपेक्षाकृत कम लागत वाला हमला बनाम करोड़ों डॉलर की interception cost।
ईरान की मिसाइल साइट्स पर हमले के बावजूद क्षमता कैसे बची?
युद्ध के शुरुआती पांच हफ्तों में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई missile sites को निशाना बनाया। इनमें कई installations underground थीं। अमेरिकी आकलन था कि ईरान का missile programme गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, लेकिन बाद में कुछ ठिकानों की recovery और दोबारा missile launches ने दिखाया कि उसकी क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
ईरान अपने सैन्य assets को underground और concealed locations में रखने के लिए भी जाना जाता है। इससे उसके लिए surviving launch infrastructure को दोबारा सक्रिय करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
Patriot के सामने कितना बड़ा दबाव?
Patriot कोई सामान्य missile defence system नहीं है। Reuters के मुताबिक इसके radar की क्षमता 150 किलोमीटर से अधिक तक हो सकती है और यह एक साथ 100 संभावित targets को track कर सकता है। दुनिया के 19 देश Patriot system operate करते हैं।
लेकिन लगातार युद्ध ने इसकी global supply chain पर भी दबाव डाल दिया है। अमेरिका ने Patriot interceptor production बढ़ाने के लिए Lockheed Martin को $58.6 billion तक का contract दिया है।
युद्ध का नया सवाल
ईरान शायद अमेरिकी air defence को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश नहीं कर रहा; वह उसकी capacity, ammunition और reaction time पर लगातार दबाव डालने की रणनीति अपना रहा है।
यही वजह है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष अब सिर्फ missile technology की लड़ाई नहीं रह गया है।
यह technology बनाम technology, quantity बनाम quality और सबसे बढ़कर cost बनाम cost की लड़ाई बन चुका है।
और यूक्रेन से मिले सबक के बाद ईरान का संदेश साफ है- अगर एक missile को रोकना आसान है, तो सवाल यह है कि क्या पूरी missile-and-drone campaign को लगातार रोकना भी उतना ही आसान होगा?

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