नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में हुए कथित पेपर लीक मामले ने अब एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले लिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ताज़ा चार्जशीट में दावा किया गया है कि यह सिर्फ प्रश्नपत्र लीक का मामला नहीं था, बल्कि NTA के विषय विशेषज्ञों, बिचौलियों, कोचिंग नेटवर्क, WhatsApp ग्रुप और करोड़ों रुपये के मनी ट्रेल से जुड़ी एक सुनियोजित साजिश थी। जांच एजेंसी के अनुसार, पूरे नेटवर्क ने परीक्षा से पहले चुनिंदा छात्रों तक प्रश्नपत्र और उसके उत्तर पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर काम किया।
कैसे चला पूरा खेल?
CBI के अनुसार, पेपर लीक की शुरुआत वहीं से हुई जहां सबसे अधिक गोपनीयता होनी चाहिए थी- NTA के कॉन्फिडेंशियल सेक्शन से। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले तीन विषय विशेषज्ञों ने गोपनीयता समझौते का उल्लंघन कर प्रश्न और उत्तर बिचौलियों तक पहुंचाए। इसके बाद इन दस्तावेज़ों को एन्क्रिप्टेड PDF फाइलों, WhatsApp और Telegram ग्रुपों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।
'स्पेशल क्लास' के नाम पर कराई गई तैयारी
चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से ठीक पहले 'स्पेशल क्लास' के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर बुलाया गया। यहां उन्हें कथित तौर पर वही प्रश्न हल कराए गए जो बाद में वास्तविक परीक्षा में पूछे गए। जांच में सामने आया कि इन सत्रों में सीमित संख्या में छात्रों को शामिल किया गया था, ताकि संदेह कम हो और पूरा नेटवर्क गोपनीय बना रहे।
WhatsApp ग्रुप बना सबसे बड़ा हथियार
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र और उत्तर साझा करने के लिए कई निजी WhatsApp ग्रुप बनाए गए थे। इनमें केवल भरोसेमंद सदस्य जोड़े जाते थे। कई मामलों में फाइलें 'View Once' या सीमित समय के लिए उपलब्ध कराई गईं, जिससे डिजिटल सबूत मिटाना आसान हो सके। कुछ स्थानों पर Telegram चैनलों का भी इस्तेमाल किया गया।
पैसों का पूरा नेटवर्क भी आया सामने
CBI का दावा है कि इस रैकेट में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। अभ्यर्थियों से भारी रकम लेकर उन्हें प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का वादा किया गया। यह पैसा अलग-अलग खातों, नकद भुगतान और बिचौलियों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने से पहले उसकी कई परतें बन जाएं। एजेंसी अब इस पूरे Money Trail की फॉरेंसिक जांच कर रही है।
20 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर
NEET-UG भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। हर वर्ष 20 लाख से अधिक छात्र इसमें भाग लेते हैं और लगभग 1.96 लाख MBBS, BDS, AYUSH तथा अन्य मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक की एक घटना भी लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य और पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर देती है।
अब आगे क्या?
CBI ने इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है और जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल चैट, मोबाइल डेटा, बैंक लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से नेटवर्क के और सदस्यों की पहचान हो सकती है। इस बीच विशेषज्ञों ने प्रश्नपत्र सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने, मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन लागू करने और भविष्य में Computer-Based Testing (CBT) जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई है।

-768x432.jpg&w=3840&q=75)


Join the discussion
No comments yet — be the first to weigh in.