अगर आप Electric Vehicle खरीदने की सोच रहे हैं... तो सिर्फ उसकी Range और कीमत देखकर फैसला मत कीजिए।
क्योंकि EV खरीदने से पहले आपको समझनी चाहिए उसकी EBCD-
E for Efficiency...
B for Battery...
C for Charging...
D for Driving।
और अगर ये चार चीजें नहीं समझीं... तो EV खरीदने के बाद आपका सफर... सच में Suffering बन सकता है।
B यानी Battery- EV का असली दिल!
आज ज्यादातर EVs में Lithium-ion battery होती है। लेकिन इसमें भी दो बड़े नाम हैं- LFP और NMC।
LFP यानी Lithium Iron Phosphate- आमतौर पर ज्यादा thermally stable, लंबी cycle life और relatively lower cost वाली chemistry। वहीं NMC यानी निकेल मैंगनीज कोबाल्ट- ज्यादा energy density देती है, यानी कम वजन में ज्यादा energy store की जा सकती है। यानी... सिर्फ battery कितने kWh की है, ये मत देखिए... उसकी chemistry भी समझिए।
C यानी Charging- AC और DC का खेल
घर पर मिलने वाली बिजली AC यानी Alternating Current होती है। EV की battery को चाहिए DC यानी Direct Current। AC charger में गाड़ी का onboard charger बिजली को AC से DC में बदलता है। लेकिन DC Fast Charger बिजली को सीधे battery तक पहुंचाता है, इसलिए charging तेज होती है। BEE के मुताबिक, करीब 30 kWh battery pack वाली एक EV को 50 kW fast charger से 80% तक charge करने में एक घंटे से कम लग सकता है। वहीं slow charging में यही काम करीब 8 घंटे तक ले सकता है।
लेकिन याद रखिए... हर दिन Fast Charging करना जरूरी नहीं कि आपकी battery के लिए सबसे अच्छा option हो। Daily use में home या normal charging ज्यादा practical हो सकती है।
E यानी Efficiency और Range का असली सच!
Company जो range बताती है... वो हर बार आपको road पर नहीं मिलेगी। Traffic... AC... तेज acceleration... speed... ऊंचाई वाली सड़कें... और driving style... सब range बदल सकते हैं। इसलिए Claimed Range नहीं... Real-World Range समझिए।
D यानी Driving और यहां आता है Regenerative Braking!
EV में जब आप accelerator छोड़ते हैं या brake लगाते हैं... तो motor कई कंडीशन्स में generator की तरह काम कर सकती है। यानि गाड़ी की कुछ kinetic energy... वापस electricity में बदलकर battery में भेजी जा सकती है। इसे कहते हैं Regenerative Braking।
लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप braking करके battery को पूरी तरह recharge कर लेंगे! ये lost energy का सिर्फ एक हिस्सा recover करने में मदद करता है।
तो EV खरीदने से पहले सिर्फ ये मत पूछिए- "कितनी Range देगी?"
पूछिए- Battery कौन-सी है? घर पर कितने घंटे में charge होगी? Fast Charging कितनी बार करनी पड़ेगी? और मेरी रोज की driving में real range कितनी मिलेगी?
क्योंकि EV का भविष्य सिर्फ Electric नहीं है... Smart भी है। और एक Smart EV Buyer बनने के लिए... बस याद रखिए- EBCD- Efficiency, Battery, Charging और Driving!

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