News Desk: अमेरिका और भारत के रिश्तों में रूस से खरीदे जा रहे कच्चे तेल को लेकर एक नया तनाव सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर नए प्रतिबंधों वाला एक व्यापक विधेयक पारित कर दिया है, जिसमें रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया जा सकता है। भारत और चीन इस प्रावधान से प्रभावित होने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं।
262-159 से पास हुआ बिल
16 सितंबर को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 262-159 के वोट से मंजूरी दी। इसके पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक इंडिपेंडेंट सदस्य ने मतदान किया। इससे पहले अमेरिकी सीनेट इस बिल को अगस्त में 86-11 के अंतर से पारित कर चुकी थी। अब बिल राष्ट्रपति ट्रंप के पास है और कानून बनने के लिए उनके हस्ताक्षर जरूरी हैं।
भारत पर 100% टैरिफ कैसे लग सकता है?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल पास होते ही भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हो गया है। कानून बनने के बाद ट्रंप को यह अधिकार मिलेगा कि वे रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकें, यदि वे निर्धारित शर्तों के तहत रूसी ऊर्जा खरीद जारी रखते हैं। भारत इन प्रमुख खरीदारों में शामिल है।
यानी फिलहाल यह संभावित अतिरिक्त टैरिफ का अधिकार है, तत्काल लागू हुआ नया शुल्क नहीं।
500% वाली खबर में क्या है सच्चाई?
यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर टैरिफ की शुरुआती प्रस्तावित सीमा 500% तक थी, लेकिन संशोधित विधेयक में भारत जैसे प्रमुख खरीदारों के लिए यह सीमा 100% तक कर दी गई। हालांकि रूस से आने वाले सामान पर अलग प्रावधान के तहत 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी विधेयक में शामिल है।
भारत रूस से इतना तेल क्यों खरीदता है?
रूस भारत के कच्चे तेल के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बन चुका है। Economic Times के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग 30.3% था। जुलाई 2026 तक रूस की हिस्सेदारी भारत के क्रूड आयात में करीब 51% बताई गई।
भारत का तर्क लगातार यह रहा है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें और उपभोक्ताओं के लिए सस्ती ऊर्जा महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी विधेयक के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी देश की 1.4 अरब आबादी के लिए किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति की प्राथमिकता दोहराई है।
अमेरिका का संदेश कितना सख्त है?
बिल पारित होने के बाद अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूसी तेल खरीद कम करने का संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदना चाहिए।
विधेयक का व्यापक उद्देश्य रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ाना, प्रतिबंधों से बचने वाले तथाकथित “शैडो फ्लीट” पर कार्रवाई करना और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना है। इसमें ईरान से जुड़े अतिरिक्त प्रतिबंध भी शामिल हैं।
अब आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करेंगे? बिल खुद भारत पर 100% टैरिफ नहीं लगाता। पहले इसे कानून बनना होगा और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन को निर्धारित कानूनी शर्तों के तहत फैसला लेना होगा। इसलिए फिलहाल इसे भारत पर लागू हो चुका 100% टैरिफ कहना सही नहीं होगा।
लेकिन अगर यह अधिकार इस्तेमाल किया जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार, भारतीय निर्यात और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद—तीनों पर इसका असर पड़ सकता है। यही वजह है कि यह विधेयक सिर्फ रूस पर अमेरिकी दबाव की कहानी नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच बढ़ते दबाव का भी महत्वपूर्ण संकेत है।





Join the discussion
No comments yet — be the first to weigh in.