News Desk: फ्रांस में छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच एक अजीब-सा नारा दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है- “Bismillah, c’est les ténèbres”। फ्रेंच और अरबी शब्दों से बने इस वाक्य का शाब्दिक अर्थ है, “अल्लाह के नाम पर, यह अंधेरा है।” पहली नजर में इसका कोई स्पष्ट राजनीतिक संदेश समझ नहीं आता, लेकिन फ्रांस के प्रदर्शनकारी इसे पुलिस की कथित नस्लीय रूढ़िवादी सोच का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। यह नारा अब फ्रांस से निकलकर इटली और बेल्जियम तक के प्रदर्शनों में दिखाई देने लगा है।
क्या है ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनेब्र’ का मतलब?
इस नारे में दो भाषाओं के शब्द शामिल हैं।
· बिस्मिल्लाह (Bismillah): अरबी भाषा का शब्द, जिसका अर्थ है ‘अल्लाह के नाम पर’। मुस्लिम समुदाय में किसी काम की शुरुआत से पहले इसका इस्तेमाल किया जाता है।
· से ले तेनेब्र (C’est les ténèbres): फ्रेंच का वाक्यांश, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘यह अंधेरा है’। इसे निराशाजनक या अंधकारमय स्थिति के संदर्भ में भी समझा जा सकता है।
दोनों को मिलाकर देखें तो इसका शाब्दिक अर्थ ‘अल्लाह के नाम पर, यह अंधेरा है’ बनता है। हालांकि, इस वाक्य का महत्व इसके सीधे अनुवाद में नहीं, बल्कि उस संदर्भ में है जिसमें फ्रांस के छात्रों ने इसे विरोध के नारे के रूप में अपनाया।
Snapchat के एक मैसेज से कैसे शुरू हुआ विवाद?
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में Snapchat पर एक बातचीत का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ। इसमें ‘Mamadou’ नाम से दिख रहे एक यूजर ने छात्रों के उस ग्रुप में शामिल होने की मांग की, जहां स्कूलों में विरोध और ब्लॉकेड की योजना बनाई जा रही थी।
उस संदेश में लिखा था, “Salut ! Bismillah c’est les ténèbres. C’est quand le blocus, wallah mon frangin?” यानी मोटे तौर पर, “हाय! बिस्मिल्लाह, यह अंधेरा है। ब्लॉकेड कब है, भाई?”
मैसेज में अल्जीरियाई झंडे वाले इमोजी भी थे। छात्रों को इसकी भाषा और अरबी-फ्रेंच स्लैंग का असामान्य मेल अजीब लगा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने संदेह जताया कि संदेश भेजने वाला कोई अंडरकवर पुलिस अधिकारी हो सकता है, जो छात्रों के निजी ऑनलाइन समूहों में घुसकर आंदोलन की जानकारी हासिल करना चाहता था।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल स्क्रीनशॉट से यह साबित नहीं होता कि संदेश किसी पुलिस अधिकारी ने भेजा था। फ्रांसीसी अधिकारियों ने भी इस खास मामले पर कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए पुलिस की कथित भूमिका को स्थापित तथ्य के बजाय प्रदर्शनकारियों के संदेह के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पुलिस की कथित नस्लीय सोच का मजाक क्यों?
फ्रांस के प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, यह नारा उस धारणा का मजाक उड़ाता है जिसमें अरब और अफ्रीकी मूल के युवाओं को हिंसा या तोड़फोड़ से जोड़कर देखा जाता है।
छात्रों को लगा कि वायरल मैसेज में इस्तेमाल की गई भाषा युवाओं की रोजमर्रा की बातचीत की नकल करने की एक असहज कोशिश थी। इसी वजह से उन्होंने इस वाक्यांश को अपने विरोध का प्रतीक बना लिया।
पेरिस की पेरिस 8 यूनिवर्सिटी से जुड़े अरब और भूमध्यसागरीय समाजशास्त्र के विशेषज्ञ यूसुफ एल चाजली ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि यह नारा पुलिस को युवाओं की वास्तविकता से अनजान और रूढ़िवादी धारणाओं से प्रभावित दिखाने वाले प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है।
फ्रांस में आखिर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं छात्र?
यह नारा ऐसे समय लोकप्रिय हुआ, जब फ्रांस में छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और जीवनयापन की लागत से जुड़े मुद्दों पर व्यापक हो रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
· स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना।
· भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और खराब शैक्षणिक सुविधाओं में सुधार।
· शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना।
· महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत पर राहत।
· सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और कथित पुलिस हिंसा की जवाबदेही।
समय के साथ छात्र आंदोलन का जुड़ाव व्यापक सामाजिक असंतोष से भी हुआ। कुछ प्रदर्शनों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं, जबकि पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। इस तरह यह नारा केवल एक वायरल मजाक नहीं रहा, बल्कि युवाओं के असंतोष और सत्ता के प्रति अविश्वास को व्यक्त करने का माध्यम बन गया।
फ्रांस से इटली और बेल्जियम तक कैसे पहुंचा नारा?
सोशल मीडिया पर मीम्स, वायरल वाक्यांश और छोटे वीडियो आज के युवा आंदोलनों में तेजी से फैलते हैं। ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनेब्र’ भी इसी तरह विरोध प्रदर्शनों की तख्तियों पर दिखाई देने लगा।
फ्रांस के अलावा इटली और बेल्जियम में भी इस नारे का इस्तेमाल देखा गया, जहां शिक्षा और जीवनयापन की लागत जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन हुए। स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी फ्रांस में छात्रों के आंदोलन के दौरान इस वाक्यांश का इस्तेमाल किया।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि इंटरनेट की संस्कृति और राजनीतिक विरोध अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। युवाओं के लिए हास्य और व्यंग्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी नाराजगी व्यक्त करने और साझा पहचान बनाने का तरीका भी बन सकते हैं।
निष्कर्ष: एक बेतुका वाक्य, लेकिन बड़ा राजनीतिक संदर्भ
‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनेब्र’ का शाब्दिक अर्थ भले ही कोई स्पष्ट संदेश न देता हो, लेकिन फ्रांस के छात्र आंदोलन में इसे पुलिस की कथित रूढ़िवादी सोच और युवाओं की शिकायतों पर व्यंग्य के रूप में अपनाया गया है।
इस नारे की लोकप्रियता यह भी बताती है कि नई पीढ़ी अपने विरोध को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया, मीम्स और इंटरनेट की भाषा का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, इसके पीछे पुलिस की कथित घुसपैठ का दावा अभी अपुष्ट है। इसलिए इस वाक्यांश को समझने के लिए उसके अनुवाद के साथ-साथ उसके सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ को समझना जरूरी है।





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